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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Apr 2025

    मैंने कैसे कैसे सदमे!

    मैं ने कैसे कैसे सदमे झेल लिए हैं,इस का मतलब ज़हर पचाया जा सकता है| शकील जमाली

  • 10th Apr 2025

    ख़ाली-पन को भरना!

    सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना,पैसा सारी उम्र कमाया जा सकता है| शकील जमाली

  • 10th Apr 2025

    इस दुनिया में हम!

    इस दुनिया में हम जैसे भी रह सकते हैं,इस दलदल पर पाँव जमाया जा सकता है| शकील जमाली

  • 10th Apr 2025

    समझाया जा सकता!

    खाने को तो ज़हर भी खाया जा सकता है,लेकिन उस को फिर समझाया जा सकता है| शकील जमाली

  • 10th Apr 2025

    आरज़ू तुम से एक भी!

    मर मिटे हम न हो सकी पूरी,आरज़ू तुम से एक भी दिल की। हसरत मोहानी

  • 10th Apr 2025

    आबरू कुछ तो!

    उन से कुछ तो मिला वो ग़म ही सही,आबरू कुछ तो रह गई दिल की। हसरत मोहानी

  • 10th Apr 2025

    किताब

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय नंद चतुर्वेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नंद चतुर्वेदी जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नंद चतुर्वेदी जी की यह कविता – उस तरह मैं नहीं पढ़ सकाजिस तरह चाहिएइस किताब में लिखी इबारत यह किताब…

  • 9th Apr 2025

    जो नहीं जानते लगी!

    मिल चुकी हम को उन से दाद-ए-वफ़ा, जो नहीं जानते लगी दिल की। हसरत मोहानी

  • 9th Apr 2025

    बात रह गई दिल की!

    याद हर हाल में रहे वो मुझे,अल-ग़रज़ बात रह गई दिल की। हसरत मोहानी

  • 9th Apr 2025

    आपने क़द्र कुछ न!

    आप ने क़द्र कुछ न की दिल की,उड़ गई मुफ़्त में हँसी दिल की। हसरत मोहानी

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