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दिखा के जलवा!
दिखा के जलवा-ए-फ़र्दा बना दे दीवाना,नए ज़माने के रुख़ से नक़ाब उठाता जा| अली सरदार जाफ़री
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जो हो सके तो बदल!
जो हो सके तो बदल ज़िंदगी को ख़ुद वर्ना,नज़ाद-ए-नौ को तरीक़-ए-जुनूँ सिखाता जा| अली सरदार जाफ़री
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नवा-ए-तल्ख़ को!
बला से बज़्म में गर ज़ौक़-ए-नग़्मगी कम है,नवा-ए-तल्ख़ को कुछ तल्ख़-तर बनाता जा| अली सरदार जाफ़री
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गुलों को छेड़ के!
गुज़र चमन से मिसाल-ए-नसीम-ए-सुब्ह-ए-बहार,गुलों को छेड़ के काँटों को गुदगुदाता जा| अली सरदार जाफ़री
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भटक रही है अँधेरे में!
भटक रही है अँधेरे में ज़िंदगी की बरात,कोई चराग़ सर-ए-रहगुज़र जलाता जा| अली सरदार जाफ़री
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ये एक पल है उसे!
अदम हयात से पहले अदम हयात के बा’द,ये एक पल है उसे जावेदाँ बनाता जा| अली सरदार जाफ़री
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आ गया है जहाँ में!
अब आ गया है जहाँ में तो मुस्कुराता जा,चमन के फूल दिलों के कँवल खिलाता जा| अली सरदार जाफ़री
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मैं ये उमीद लिए!
कभी तो मेरी भी सुनवाई होगी महफ़िल में,मैं ये उमीद लिए बार बार जाता रहा| जावेद अख़्तर
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केवल दो गीत लिखे!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ गीतकार स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। राजन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का यह गीत– केवल दो गीत लिखे मैंनेइक गीत तुम्हारे मिलने काइक गीत तुम्हारे खोने का। सड़कों-सड़कों, शहरों-शहरोंनदियों-नदियों, लहरों-लहरोंविश्वास…