Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 30th Jun 2025

    शेर ताज़ा कोई!

    कल से मसरूफ़-ए-ख़ैरियत मैं हूँ,शेर ताज़ा कोई हुआ ही नहीं| फ़हमी बदायूनी

  • 30th Jun 2025

    राह से हटा ही नहीं!

    मुझ पे हो कर गुज़र गई दुनिया,मैं तिरी राह से हटा ही नहीं| फ़हमी बदायूनी

  • 30th Jun 2025

    घर के मलबे से!

    घर के मलबे से घर बना ही नहीं,ज़लज़ले का असर गया ही नहीं| फ़हमी बदायूनी

  • 30th Jun 2025

    कहीं पे था ही नहीं!

    तेरे जैसा कोई मिला ही नहीं,कैसे मिलता कहीं पे था ही नहीं| फ़हमी बदायूनी

  • 30th Jun 2025

    आरज़ू ही रह गई!

    आरज़ू ही रह गई ‘मजरूह’ कहते हम कभी,इक ग़ज़ल ऐसी जिसे तस्वीर-ए-जानाना कहें| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 30th Jun 2025

    शहर को वीरान या!

    पारा-ए-दिल है वतन की सरज़मीं मुश्किल ये है,शहर को वीरान या इस दिल को वीराना कहें| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 30th Jun 2025

    तिश्नगी ही तिश्नगी है!

    तिश्नगी ही तिश्नगी है किस को कहिए मय-कदा,लब ही लब हम ने तो देखे किस को पैमाना कहें| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 30th Jun 2025

    उस बुत की कलाई!

    थामें उस बुत की कलाई और कहें इस को जुनूँ,चूम लें मुँह और इसे अंदाज़-ए-रिंदाना कहें| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 30th Jun 2025

    चाहे दीवाना कहें!

    दार पर चढ़ कर लगाएँ नारा-ए-ज़ुल्फ़-ए-सनम,सब हमें बाहोश समझें चाहे दीवाना कहें| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 30th Jun 2025

    दीप और मनुष्य!

    एक बार फिर से आज मैं हिंदी गीतों के राजकुंवर कहलाने वाले स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। नीरज जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपालदास नीरज जी का यह गीत– एक दिन मैंने कहा यूँ दीप से‘‘तू धरा पर…

←Previous Page
1 … 293 294 295 296 297 … 1,447
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,131 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar