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चराग़ याद का!
गली के मोड़ से घर तक अँधेरा क्यूँ है ‘निज़ाम’,चराग़ याद का उस ने बुझा दिया होगा| शीन काफ़ निज़ाम
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भले आदमी!
आज मैं हिंदी के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। भवानी दादा की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की यह कविता – भले आदमीरुक रहने का पलअभी नहीं आया बीज जिस फल के लिएतूने…
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चुभन ये पीठ में कैसी!
चुभन ये पीठ में कैसी है मुड़ के देख तो ले, कहीं कोई तुझे पीछे से देखता होगा| शीन काफ़ निज़ाम