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आकाशदीप!
एक बार फिर से आज मैं वरिष्ठ हिंदी कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत– जलता रहता सारी रात एक आस मेंमेरे आँगन का आकाशदीप । पीले अक्षत…
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वो मिरा घर है!
किस ढिटाई से वो दिल छीन के कहते हैं ‘अमीर’,वो मिरा घर है रहे जिस में मोहब्बत मेरी| अमीर मीनाई
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तेरी तस्वीर में!
हुस्न और इश्क़ हम-आग़ोश नज़र आ जाते,तेरी तस्वीर में खिंच जाती जो हैरत मेरी| अमीर मीनाई
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यार पहलू में है!
यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले,आज क्यूँ दिल में छुपी बैठी है हसरत मेरी| अमीर मीनाई
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बेदर्द नज़ाकत मेरी!
मैं ने आग़ोश-ए-तसव्वुर में भी खेंचा तो कहा,पिस गई पिस गई बेदर्द नज़ाकत मेरी| अमीर मीनाई