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तेरा मक़्सद है क्या!
तेरा मक़्सद है क्या मैं समझ जाऊँगा,कोई मौसम ही की बात प्यारे उठा| कृष्ण बिहारी नूर
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आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव में!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ गीतकार स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की है। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का यह गीत – आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव मेंजनता है चिन्ता की मारी मेरे गाँव में फिर वही चौराहे…
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जी तो कहता है कि!
जी तो कहता है कि बिस्तर से न उतरूँ कई रोज़,घर में सामान तो हो बैठ के खाने के लिए| शकील जमाली
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दूकान चलाने के लिए!
नफ़रतें बेचने वालों की भी मजबूरी है, माल तो चाहिए दूकान चलाने के लिए| शकील जमाली
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मैं उसे ढूँढ रहा हूँ!
हो गई है मिरी उजड़ी हुई दुनिया आबाद,मैं उसे ढूँढ रहा हूँ ये बताने के लिए| शकील जमाली