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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th May 2025

    चाहत के बदले में हम!

    चाहत के बदले में हम तो बेच दें अपनी मर्ज़ी तक, कोई मिले तो दिल का गाहक कोई हमें अपनाए तो| अंदलीब शादानी

  • 19th May 2025

    दामन हाथ में आए तो!

    शफ़क़ धनक महताब घटाएँ तारे नग़्मे बिजली फूल,इस दामन में क्या क्या कुछ है दामन हाथ में आए तो| अंदलीब शादानी

  • 19th May 2025

    वैसे हम घबराए तो!

    देर लगी आने में तुम को शुक्र है फिर भी आए तो, आस ने दिल का साथ न छोड़ा वैसे हम घबराए तो| अंदलीब शादानी

  • 19th May 2025

    गीतों का बादल!   

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। अवस्थी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर नहीं हैं।   लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का यह गीत  – मैं गीत बरसाने वाला बादल हूँ ।प्यासे नयनों में हँसता काजल हूँ ।…

  • 18th May 2025

    लकड़ियाँ सुलगने में!

    मुस्तक़िल नहीं ‘अमजद’ ये धुआँ मुक़द्दर का,लकड़ियाँ सुलगने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

  • 18th May 2025

    हुस्न के सँवरने में!

    हो चमन के फूलों का या किसी परी-वश का, हुस्न के सँवरने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

  • 18th May 2025

    भीड़ वक़्त लेती है!

    भीड़ वक़्त लेती है रहनुमा परखने में, कारवान बनने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

  • 18th May 2025

    तितलियाँ पकड़ने में!

    उन की और फूलों की एक सी रिदाएँ हैं, तितलियाँ पकड़ने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

  • 18th May 2025

    रंग यूँ तो होते हैं!

    रंग यूँ तो होते हैं बादलों के अंदर ही, पर धनक के बनने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

  • 18th May 2025

    ख़्वाहिशें परिंदों से!

    ख़्वाहिशें परिंदों से लाख मिलती-जुलती हों, दोस्त पर निकलने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

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