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तेरी छवि!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामनरेश त्रिपाठी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। त्रिपाठी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामनरेश त्रिपाठी जी की यह कविता – हे मेरे प्रभु! व्याप्त हो रही है तेरी छवि त्रिभुवन में।तेरी ही छवि का विकास…
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नादानी और मजबूरी!
नादानी और मजबूरी में यारो कुछ तो फ़र्क़ करो, इक बे-बस इंसान करे क्या टूट के दिल आ जाए तो| अंदलीब शादानी
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झूट है सब तारीख़!
झूट है सब तारीख़ हमेशा अपने को दोहराती है, अच्छा मेरा ख़्वाब-ए-जवानी थोड़ा सा दोहराए तो| अंदलीब शादानी
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चाहत आग लगाए तो!
सुनी-सुनाई बात नहीं ये अपने ऊपर बीती है, फूल निकलते हैं शो‘लों से चाहत आग लगाए तो| अंदलीब शादानी
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धोके में आ जाए तो!
क्यूँ ये मेहर-अंगेज़ तबस्सुम मद्द-ए-नज़र जब कुछ भी नहीं, हाए कोई अंजान अगर इस धोके में आ जाए तो| अंदलीब शादानी