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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th May 2025

    बहुत शोर सुनते थे!

    न सावन ही बरसा न भादों ही बरसा, बहुत शोर सुनते थे बरसात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 20th May 2025

    समझती है शाम ओ!

    समझती है शाम ओ सहर जिस को दुनिया, तिरे ज़ुल्फ़ ओ आरिज़ की ख़ैरात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 20th May 2025

    यक़ीनन वो तारों भरी!

    मिरे अश्क जिस शब के दामन में होंगे,यक़ीनन वो तारों भरी रात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 20th May 2025

    तेरी छवि!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामनरेश त्रिपाठी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। त्रिपाठी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामनरेश त्रिपाठी जी की यह कविता – हे मेरे प्रभु! व्याप्त हो रही है तेरी छवि त्रिभुवन में।तेरी ही छवि का विकास…

  • 19th May 2025

    ज़बाँ चुप रहेगी !

    निगाहों से शरह-ए-हिकायात होगी,ज़बाँ चुप रहेगी मगर बात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 19th May 2025

    अगर हो गई तो!

    सुना है कि उन से मुलाक़ात होगी,अगर हो गई तो बड़ी बात होगी| नज़ीर बनारसी

  • 19th May 2025

    नादानी और मजबूरी!

    नादानी और मजबूरी में यारो कुछ तो फ़र्क़ करो, इक बे-बस इंसान करे क्या टूट के दिल आ जाए तो| अंदलीब शादानी

  • 19th May 2025

    झूट है सब तारीख़!

    झूट है सब तारीख़ हमेशा अपने को दोहराती है, अच्छा मेरा ख़्वाब-ए-जवानी थोड़ा सा दोहराए तो| अंदलीब शादानी

  • 19th May 2025

    चाहत आग लगाए तो!

    सुनी-सुनाई बात नहीं ये अपने ऊपर बीती है, फूल निकलते हैं शो‘लों से चाहत आग लगाए तो| अंदलीब शादानी

  • 19th May 2025

    धोके में आ जाए तो!

    क्यूँ ये मेहर-अंगेज़ तबस्सुम मद्द-ए-नज़र जब कुछ भी नहीं, हाए कोई अंजान अगर इस धोके में आ जाए तो| अंदलीब शादानी

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