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बह नहीं जाना लहर में!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी का यह नवगीत – यह मधुर मधुवंत बेलामन नहीं है अब अकेलास्वप्न का संगीत कंगन की तरह खनका सांझ…