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इच्छा-शक्ति!
एक बार फिर से आज मैं, श्रेष्ठ हिंदी कवि और कुशल मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। चक्रधर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता– ओ ठोकर !तू सोच रहीमैं बैठ जाऊंगीरोकर,भ्रम है तेराचल दूंगी…
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उम्र जो बे-ख़ुदी में!
उम्र जो बे-ख़ुदी में गुज़री है,बस वही आगही* में गुज़री है| *जानकारी गुलज़ार देहलवी