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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Oct 2025

    तमाम शहर में !

    तमाम शहर में मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू है यही,कि शाहज़ादी ग़ुलामों में आ के बैठ गई| मुनव्वर राना

  • 1st Oct 2025

    तमाम गर्द किताबों में !

    तमाम तल्ख़ियाँ साग़र में रक़्स करने लगीं,तमाम गर्द किताबों में आ के बैठ गई| मुनव्वर राना

  • 1st Oct 2025

    वो फ़ाख़्ता जो मुझे!

    वो फ़ाख़्ता जो मुझे देखते ही उड़ती थी,बड़े सलीक़े से बच्चों में आ के बैठ गई| मुनव्वर राना

  • 1st Oct 2025

    जगा रहा है ज़माना!

    जगा रहा है ज़माना मगर नहीं खुलतीं,कहाँ की नींद इन आँखों में आ के बैठ गई| मुनव्वर राना

  • 1st Oct 2025

    ज़िंदगी आज की एक अंधा कुआं!

    आज प्रस्तुत है , यू ट्यूब पर मेरे स्वर में मेरा एक और गीत- https://youtu.be/_X3SmJtAew4?si=c UTMWVZHUKP-n3n4 ज़िंदगी आज की एक अंधा कुआंआप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा।

  • 1st Oct 2025

    अजीब मैना है!

    अना हवस की दुकानों में आ के बैठ गई,अजीब मैना है शिकरों में आ के बैठ गई| मुनव्वर राना

  • 1st Oct 2025

    जन्नत पुकारती है!

    जन्नत पुकारती है कि मैं हूँ तिरे लिए,दुनिया ब-ज़िद है मुझ से कि जन्नत करो मुझे| मुनव्वर राना

  • 1st Oct 2025

    कब तक रहें देखते एल्बम!

    आज प्रस्तुत है एक नवगीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कब तक रहें देखते एल्बम! बदल गया, कुछ बदल रहा हैअब पहले सा कुछ न रहा है,केवल हल्की सी छाया हैसब कुछ पल-पल छीज रहा है। हम अब भी मन में पाले हैंपहले सा होने का मतिभ्रम। सभी देखते बारी-बारीसमय बली की मीनाकारीजीवित हैं हाँ…

  • 30th Sep 2025

    छत करो मुझे!

    कुछ भी हो मुझ को एक नई शक्ल चाहिए, दीवार पर बिछाओ मुझे छत करो मुझे| मुनव्वर राना

  • 30th Sep 2025

    पानी ने कब कहा था!

    मैं ने तो तुम से की ही नहीं कोई आरज़ू,पानी ने कब कहा था कि शर्बत करो मुझे| मुनव्वर राना

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