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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Jan 2026

    नक़्श मिटाते रहना!

    रात के दश्त में फूल खिले हैं भूली-बिसरी यादों के,ग़म की तेज़ शराब से उन के तीखे नक़्श मिटाते रहना| मुनीर नियाज़ी

  • 6th Jan 2026

    घर भी जाते रहना!

    अपने घरों से दूर बनों में फिरते हुए आवारा लोगो,कभी कभी जब वक़्त मिले तो अपने घर भी जाते रहना| मुनीर नियाज़ी

  • 6th Jan 2026

    सजन रे झूठ मत बोलो

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मुकेश जी का गाया एक और गीत, फिल्म- तीसरी कसम से, अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 6th Jan 2026

    सातों दिन भगवान के!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज फिर से मैं निदा फाज़ली साहब के लिखे कुछ दोहे अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिनको जगजीत सिंह जी ने गाया था- सातों दिन भगवान के, क्या मंगल क्या वीर! आशा है आपको ये पसंद आएंगे, धन्यवाद। *****

  • 6th Jan 2026

    अपना तो ये काम है!

    अपना तो ये काम है भाई दिल का ख़ून बहाते रहना,जाग जाग कर इन रातों में शे’र की आग जलाते रहना| मुनीर नियाज़ी

  • 6th Jan 2026

    बेटियाँ!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि तथा मेरे लिए गुरु तुल्य रहे स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की एक  रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी का यह गीत – बेटियाँ-शीतल हवाएँ हैंजो पिता के घर बहुत दिन तक…

  • 5th Jan 2026

    अजब दर्द था ‘मुनीर’!

    उस आख़िरी नज़र में अजब दर्द था ‘मुनीर’,जाने का उस के रंज मुझे उम्र भर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 5th Jan 2026

    कोई है भी या नहीं!

    ख़ौफ़ आसमाँ के साथ था सर पर झुका हुआ,कोई है भी या नहीं है यही दिल में डर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 5th Jan 2026

    मैं रोया परदेस में!

    अपने यूट्यूब चैनल के साथ मैं फिर उपस्थित हूँ, इस बार मैं निदा फाज़ली साहब के लिखे कुछ दोहे अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिनको जगजीत सिंह जी ने गाया था, जैसे- मैं रोया परदेस में, भीगा मां का प्यार, दुख ने दुख से बात की, बिन चिट्ठी, बिन तार। आशा है आपको…

  • 5th Jan 2026

    दूरी का ये तिलिस्म!

    गुज़री है क्या मज़े से ख़यालों में ज़िंदगी,दूरी का ये तिलिस्म बड़ा कारगर रहा| मुनीर नियाज़ी

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