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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Jan 2026

    खंडहर गीत

    आज फिर से प्रस्तुत है मेरा एक पुराना गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- तुम उजाड़ों से न ऊब जाओ कहींमैं सजाता रहा खंडहर इसलिए। ये तिमिर से घिरी राजसी सीढ़ियां,इनसे चढ़ती उतरती रही पीढ़ियां,युग बदलते रहे,तंत्र गलते गए,टूटती ही रहीं वंशगत रूढ़ियां। था कभी जो महल, बन वही अब गया,बेघरों के लिए है, बसेरा…

  • 8th Jan 2026

    इस कबूतर को!

    एक बे-नाम से रिश्ते की तमन्ना ले कर, इस कबूतर को किसी छत पे उतर जाना है| मुनव्वर राना

  • 8th Jan 2026

    ज़िंदगी ताश के पत्तों!

    ज़िंदगी ताश के पत्तों की तरह है मेरी,और पत्तों को बहर-हाल बिखर जाना है| मुनव्वर राना

  • 8th Jan 2026

    रोते हुए मर जाना है!

    मैं वो मेले में भटकता हुआ इक बच्चा हूँ,जिस के माँ बाप को रोते हुए मर जाना है| मुनव्वर राना

  • 8th Jan 2026

    घर की दहलीज़ पे!

    घर की दहलीज़ पे रौशन हैं वो बुझती आँखें,मुझ को मत रोक मुझे लौट के घर जाना है| मुनव्वर राना

  • 8th Jan 2026

    सब कुछ सीखा हमने!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में एक और गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मुकेश जी ने अनाड़ी फिल्म के लिए गाया था- सब कुछ सीखा हमने, ना सीखी होशियारी! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ********

  • 8th Jan 2026

    गोरे-गोरे चांद से मुख पर!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज मुकेश जी का गाया ‘अनिता’ फिल्म का यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- गोरे-गोरे चांद से मुख पर काली-काली आंखें हैं आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 8th Jan 2026

    मुझ को गहराई में!

    मुझ को गहराई में मिट्टी की उतर जाना है,ज़िंदगी बाँध ले सामान-ए-सफ़र जाना है| मुनव्वर राना

  • 8th Jan 2026

    शांत कदम – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 7th Jan 2026

    मैं तुम्हारा रहा!

    मैं तुम्हारा रहा रात भरकसमसाता रहा रात भर। आदर्श दुबे

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