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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Jul 2025

    तुम ठहर जाओ तो!

    हम तो जाने कब से हैं आवारा-ए-ज़ुल्मत मगर,तुम ठहर जाओ तो पल भर में गुज़र जाएगी रात| सुरूर बाराबंकवी

  • 20th Jul 2025

    आफ़्ताब आने की देर!

    है उफ़ुक़ से एक संग-ए-आफ़्ताब आने की देर,टूट कर मानिंद-ए-आईना बिखर जाएगी रात| सुरूर बाराबंकवी

  • 20th Jul 2025

    मौज-ए-ख़ूँ बन कर!

    अहल-ए-तूफ़ाँ बे-हिसी का गर यही आलम रहा,मौज-ए-ख़ूँ बन कर हर इक सर से गुज़र जाएगी रात| सुरूर बाराबंकवी

  • 20th Jul 2025

    जीवन!

    एक बार फिर से आज मैं, श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। वाजपेयी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता– तुम्हें जीने के लिएकम से कम क्या चाहिए ?थोड़ी सी रोटी, कुछ नमक,…

  • 19th Jul 2025

    ज़हर भर जाएगी रात!

    ज़िंदगी में और भी कुछ ज़हर भर जाएगी रात,अब अगर ठहरी रग-ओ-पै में उतर जाएगी रात| सुरूर बाराबंकवी

  • 19th Jul 2025

    गुज़र जाएगी रात!

    और कोई दम की मेहमाँ है गुज़र जाएगी रात,ढलते ढलते आप-अपनी मौत मर जाएगी रात| सुरूर बाराबंकवी

  • 19th Jul 2025

    लौट कर नहीं मिलना!

    जुदा तो जब भी हुए दिल को यूँ लगा जैसे,कि अब गए तो कभी लौट कर नहीं मिलना| सुरूर बाराबंकवी

  • 19th Jul 2025

    इस सफ़र में कोई!

    रह-ए-वफ़ा के मुसाफ़िर को कौन समझाए,कि इस सफ़र में कोई हम-सफ़र नहीं मिलना| सुरूर बाराबंकवी

  • 19th Jul 2025

    टूटकर नहीं मिलना!

    चलो ज़माने की ख़ातिर ये जब्र भी सह लें,कि अब मिले तो कभी टूट कर नहीं मिलना| सुरूर बाराबंकवी

  • 19th Jul 2025

    तुमसे गर नहीं मिलना!

    तो क्या ये तय है कि अब ‘उम्र भर नहीं मिलना,तो फिर ये ‘उम्र भी क्यों तुम से गर नहीं मिलना| सुरूर बाराबंकवी

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