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दिल्ली! (कविता)
आज मैं हिंदी के अत्यंत श्रेष्ठ कवि तथा राष्ट्रकवि के रूप में सम्मान पाने वाले स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक अलग किस्म की रचना शेयर कर रहा हूँ। दिनकर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की यह कविता –…
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मुस्तक़िल ज़ख़्म का!
मैं भुलाना भी नहीं चाहता इस को लेकिन, मुस्तक़िल ज़ख़्म का रहना भी बुरा होता है| मुनव्वर राना
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देखा हुआ होता है!
सारी दुनिया का सफ़र ख़्वाब में कर डाला है,कोई मंज़र हो मिरा देखा हुआ होता है| मुनव्वर राना
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रमैया वस्तावैया!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म – श्री 420 के एक समूह गान का मुकेश जी द्वारा गाया गया भाग अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- रस्ता वही और मुसाफिर वहीएक तारा न जाने कहाँ छुप गया। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******
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ख़ाक आँखों से लगाई!
ख़ाक आँखों से लगाई तो ये एहसास हुआ,अपनी मिट्टी से हर इक शख़्स जुड़ा होता है| मुनव्वर राना
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जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, जगजीत सिंह-चित्रा सिंह द्वारा गाई गई एक लोकप्रिय ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ- मेरे जैसे बन जाओगे, जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******
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खंडहर गीत
आज फिर से प्रस्तुत है मेरा एक पुराना गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- तुम उजाड़ों से न ऊब जाओ कहींमैं सजाता रहा खंडहर इसलिए। ये तिमिर से घिरी राजसी सीढ़ियां,इनसे चढ़ती उतरती रही पीढ़ियां,युग बदलते रहे,तंत्र गलते गए,टूटती ही रहीं वंशगत रूढ़ियां। था कभी जो महल, बन वही अब गया,बेघरों के लिए है, बसेरा…