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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Sep 2026

    दिन को जलाते हैं चराग़!

    ऐसी तारीकियाँ आँखों में बसी हैं कि ‘फ़राज़’,रात तो रात है हम दिन को जलाते हैं चराग़| अहमद फ़राज़

  • 14th Sep 2026

    ऐसे बेदर्द हुए हम!

    ऐसे बेदर्द हुए हम भी कि अब गुलशन पर,बर्क़ गिरती है तो ज़िंदाँ में जलाते हैं चराग़| अहमद फ़राज़

  • 14th Sep 2026

    ये दिल ये पागल दिल मेरा!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में ग़ुलाम अली जी का गाया एक शेर- ये दिल ये पागल दिल मेरा क्यों बुझ गया आवारगी! फिल्म- माटी मांगे खून शायर- मोहसिन नक़वी गायक- ग़ुलाम अली प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । *****

  • 14th Sep 2026

    दिल की कहानी!

    ‘दिल’ को विषय बनाकर लिखे गए गीतों के बहाने मेरी लाइव प्रस्तुति आपके समक्ष पेश है- दिल की कहानी लिखना! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******

  • 14th Sep 2026

    बस्तियाँ चाँद सितारों की!

    बस्तियाँ चाँद सितारों की बसाने वालो,कुर्रा-ए-अर्ज़* पे बुझते चले जाते हैं चराग़|*Globe अहमद फ़राज़

  • 14th Sep 2026

    दुनिया को दिखाते हैं चराग़!

    गो सियह-बख़्त हैं हम लोग पे रौशन है ज़मीर,ख़ुद अँधेरे में हैं दुनिया को दिखाते हैं चराग़| अहमद फ़राज़

  • 14th Sep 2026

    दामन भी भड़क उठते हैं!

    क्या ख़बर उन को कि दामन भी भड़क उठते हैं,जो ज़माने की हवाओं से बचाते हैं चराग़| अहमद फ़राज़

  • 14th Sep 2026

    मैं दीवाना मस्ताना!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- मैं दीवाना मस्ताना, मुश्किल भेद मेरा पा जाना !फिल्म- चालीस दिन अभिनेता- प्रेम नाथ, शकीला गीतकार- कैफ़ी आज़मी संगीतकार- बिपिन बाबुलगायक- मुकेश प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******

  • 14th Sep 2026

    राजभाषा हिंदी की ट्रैडमिल!

    आज आ गया है 14, सितंबर अर्थात ‘हिंदी दिवस’। इस दिवस की शुभकामनाएं, यदि इस दिन से हिंदी को कुछ मिला है! एक घोषणा हुई थी ‘हिंदी’ को राजभाषा बनाने, ढेर सारे किंतु-परंतु के साथ। बस यही है कि रिपोर्टें तैयार होती रहेंगी और हिंदी जहाँ थी, वहीं है। हिंदी को अगर आगे बढ़ाया है,…

  • 14th Sep 2026

    कवि गाता है!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि नेमिचंद्र जैन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत है श्री नेमिचंद्र जैन जी की यह कविता- कवि गाता है–संक्रान्ति काल का कलाकार कवि गाता है ।देख चांदनी रातें कवि का नाच उठा उरस्वप्न-देश की परियों के गायन…

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