अपने यूटृयूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में पयाम सिद्दीक़ी जी की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह जी ने बड़े खूबसूरत ढंग से गाया है-
तेरा चेहरा है आईने जैसा, क्यों न देखूं है देखने जैसा!
आशा है आपको यह प्रस्तुति पसंद आएगी,
धन्यवाद।
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