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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Jul 2025

    मेरे लबों पर तेरा!

    रंग बदलती इस दुनिया में सब कुछ बदल गया लेकिन,मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था आज भी है| हस्तीमल हस्ती

  • 28th Jul 2025

    तुझ से इक रिश्ता!

    ख़्वाब में तेरा आना-जाना पहले भी था आज भी है,तुझ से इक रिश्ता अन-जाना पहले भी था आज भी है| हस्तीमल हस्ती

  • 28th Jul 2025

    हार जीत कोई भी!

    खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो,हार जीत कोई भी आख़िरी नहीं होती| हस्तीमल हस्ती

  • 28th Jul 2025

    शायरी है सरमाया!

    शायरी है सरमाया ख़ुश-नसीब लोगों का,बाँस की हर इक टहनी बाँसुरी नहीं होती|

  • 28th Jul 2025

    ख़ुद चराग़ बन के!

    ख़ुद चराग़ बन के जल वक़्त के अँधेरे में,भीक के उजालों से रौशनी नहीं होती| हस्तीमल हस्ती

  • 28th Jul 2025

    दोस्ती नहीं होती!

    दोस्त पे करम करना और हिसाब भी रखना,कारोबार होता है दोस्ती नहीं होती| हस्तीमल हस्ती

  • 28th Jul 2025

    इतनी ख़ूबसूरत ये!

    दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती,इतनी ख़ूबसूरत ये ज़िंदगी नहीं होती| हस्तीमल हस्ती

  • 28th Jul 2025

    कोयल के कानों में कह दी!

    एक बार फिर से आज मैं, श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अश्वघोष जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ।अश्वघोष जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अश्वघोष जी का यह नवगीत– कोयल के कानों में कह दीकुछ बात रस भरीसुधियों में फूल गई आम्र-मंजरी । हरियाले पत्तों की…

  • 27th Jul 2025

    ले गया हमराह अपने!

    ले गया हमराह अपने वो मकाँ और बाम-ओ-दर,है नज़र सब कुछ मगर इक बे-मकानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 27th Jul 2025

    फिर से जवानी दे गया!

    बज़्म में बे-पर्दा आया मुस्कुरा कर सामने,ना-तवाँ दिल को मिरे फिर से जवानी दे गया| नज़र कानपुरी

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