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पर्वत से छन कर झरता है पानी!
एक बार फिर से आज मैं, हिंदी नवगीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। इनकी अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत– पर्वत से छन कर झरता है पानी,जी भर कर पियोऔर पियो । घाटी-दर-घाटी…
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ख़ामोश हो गए हैं!
शायद ज़बाँ पे क़र्ज़ था हम ने चुका दिया,ख़ामोश हो गए हैं तुझे हम पुकार के| अजय सहाब