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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Aug 2025

    आईना बे-वजह!

    अपना चेहरा न पोंछा गया आप से,आईना बे-वजह तोड़ कर रख दिया| उदय प्रताप सिंह

  • 20th Aug 2025

    आँधी का डर रख दिया!

    तुम ने ये क्या किया बत्तियों की जगह,इन चराग़ों में आँधी का डर रख दिया| उदय प्रताप सिंह

  • 20th Aug 2025

    लम्बा सफ़र रख दिया!

    दे के कस्तूरी हिरनों की तक़दीर में,प्यास का एक लम्बा सफ़र रख दिया| उदय प्रताप सिंह

  • 20th Aug 2025

    एक लम्हे को सूरज !

    एक लम्हे को सूरज ठहर सा गया,हाथ उस ने मिरे हाथ पर रख दिया| उदय प्रताप सिंह

  • 20th Aug 2025

    चाँद किस ने इधर का!

    तुम मिरे पास हो रात हैरान है,चाँद किस ने इधर का उधर रख दिया| उदय प्रताप सिंह

  • 20th Aug 2025

    कितने फूलों का सर!

    हम ने माना कि महका के घर रख दिया,कितने फूलों का सर काट कर रख दिया| उदय प्रताप सिंह

  • 20th Aug 2025

    उदासी का मुसाफ़िर यारो!

    क्यूँ न लौटे वो उदासी का मुसाफ़िर यारो,ज़ख़्म सीने के उसे रोज़ सदा देते हैं| अजय सहाब

  • 20th Aug 2025

    एक और गीत!

    आज प्रस्तुत है मेरी एक नई रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- तुमने चाहा था देखोगेमेरी रचनाओं की दुनिया,रुको द्वार पर सजा रहा हूँपीड़ाओं की जगमग लड़ियां| भीतर की दुनिया इतनी रंगीन नहीं,वश में रखना तुमअपने कौतूहल को, पाषाणों के बीच पटकना पड़ता है मन के कोमल भावोंकी इस मखमल को, हतप्रभ मत होनाजब भीतर…

  • 19th Aug 2025

    अफ़्वाह उड़ा देते हैं!

    होश में हो के भी साक़ी का भरम रखने को,लड़खड़ाने की हम अफ़्वाह उड़ा देते हैं| अजय सहाब

  • 19th Aug 2025

    सुब्ह होते ही जिन्हें!

    रात आई तो तड़पते हैं चराग़ों के लिए,सुब्ह होते ही जिन्हें लोग बुझा देते हैं| अजय सहाब

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