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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th Aug 2025

    दर्द हीरा है दर्द मोती है!

    दर्द हीरा है दर्द मोती है,दर्द आँखों से मत बहाया कर| शकील आज़मी

  • 29th Aug 2025

    मुस्कुराया कर!

    काम ले कुछ हसीन होंठों से, बातों बातों में मुस्कुराया कर| शकील आज़मी

  • 29th Aug 2025

    भीग जाया कर!

    ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर,बारिशें हों तो भीग जाया कर| शकील आज़मी

  • 29th Aug 2025

    टूटता रहता हूँ हर गाम!

    मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा ‘शकील’,टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

  • 29th Aug 2025

    टपके हुए आँसू की तरह!

    तू भी खो जाएगी टपके हुए आँसू की तरह,देख ऐ गर्दिश-ए-अय्याम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

  • 29th Aug 2025

    मैं हूँ इक धूल भरी शाम!

    तू नई सुबह के सूरज की है उजली सी किरन,मैं हूँ इक धूल भरी शाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

  • 29th Aug 2025

    तू भी हो जाएगा बदनाम!

    मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल,तू भी हो जाएगा बदनाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

  • 29th Aug 2025

    ज़िंदगी नाम है !

    हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत ‘फ़ानी’,ज़िंदगी नाम है मर मर के जिए जाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 29th Aug 2025

    अचानक तुम आ जाओ!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री आलोक धन्वा जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। आलोक जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री आलोक धन्वा जी की यह कविता- इतनी रेलें चलती हैंभारत मेंकभीकहीं से भी आ सकती होमेरे पास कुछ दिन रहना इस घर मेंजो…

  • 28th Aug 2025

    दिल मिरे ख़ून से!

    चश्म-ए-साक़ी असर-ए-मय से नहीं है गुल-रंग,दिल मिरे ख़ून से लबरेज़ है पैमाने का| फ़ानी बदायुनी

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