-
सपने हमारे!
प्रस्तुत है आज की रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- सपनों की अलग ही दुनिया हैनिराली, नशीलीभयावह भी होती है कभी! एक अलग दुनिया है वोलेकिन उसका आधार हमारी ज़िंदगी में ही है, हमारी कामनाएं, हमारे भयवे ही सृजन करते हैंहमारे सपनों का। जैसे सायास हम रचते हैं कविता, वैसे ही कामनाओं और आशंकाओं मेंउलझा…
-
सफ़र में साथ रहे!
प जैसे रेल में दो अजनबी मुसाफ़िर हों,सफ़र में साथ रहे यूँ तो हम तुम्हारे भी| अमजद इस्लाम अमजद
-
बड़े सुकून से डूबे थे!
बड़े सुकून से डूबे थे डूबने वाले,जो साहिलों पे खड़े थे बहुत पुकारे भी| अमजद इस्लाम अमजद
-
चलते हैं दो किनारे भी!
सवाल ये है कि आपस में हम मिलें कैसे,हमेशा साथ तो चलते हैं दो किनारे भी| अमजद इस्लाम अमजद
-
थे ख़्वाब एक हमारे भी!
थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी,पर अपना खेल दिखाते रहे सितारे भी| अमजद इस्लाम अमजद
-
अभिमत बदलते हैं!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि इसाक अश्क जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। इसाक जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है इसाक अश्क जी का यह नवगीत – रंगगिरगिट की तरहअभिमत बदलते हैं । रोज़करते हैं तरफ़दारीअंधेरों कीरोशनी कोलूटने वालेलुटेरों की इसमेंनहीं होते सफल तोहाथ मलते हैं…