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जब किसी बच्चे ने!
यूँ लगा जैसे कोई इत्र फ़ज़ा में घुल जाए,जब किसी बच्चे ने क़ुरआँ की तिलावत की है| राहत इंदौरी
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जब कभी फूलों ने!
जब कभी फूलों ने ख़ुश्बू की तिजारत की है,पत्ती पत्ती ने हवाओं से शिकायत की है| राहत इंदौरी
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गीत अलग ही सुर में!
आज प्रस्तुत है एक ग़ज़ल, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- गीत अलग ही सुर में गाया जा सकता था, पीड़ा का एहसास दबाया जा सकता था। मुख जब दंतविहीन हुआ तब ज्ञान मिला येकोई और जुगाड़ लगाया जा सकता है। दावत खाकर घर आए तब सोचा हमने,छोड़ा बहुत, और कुछ खाया जा सकता था। छूट…