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मैं चलता!
आज एक बार फिर मैं वरिष्ठ हिंदी नवगीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत– मैं चलतामेरे साथ चला करता पग-पगवह सत्य कि जिसको पाकरधन्य हुआ जीवन ।…
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एक स्टेशन पे गाड़ी!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं कुछ हास्य पंक्ति सुना रहा हूँ, जो मैंने बहुत पहले ट्रेन यात्रा करते समय ही सुनी थी, किसने लिखा है मुझे मालूम नहीं है- एक स्टेशन पे गाड़ी क्यों चिपककर रह गई! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *******