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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Feb 2018

    17. लेखनी मिली थी गीतव्रता, प्रार्थना पत्र लिखते बीती!

    फिलहाल वही काम कर रहा हूँ, जो सबसे आसान है, अपने पुराने ब्लॉग दोहराना, लीजिए प्रस्तुत है एक और ब्लॉग।  ऐसा लगता है कि कवियों, साहित्यकारों की बात अगर करते रहेंगे तो दिल्ली छोड़कर आगे ही नहीं बढ़ पाएंगे। लेकिन कुछ लोगों की बात तो करनी ही होगी। आज पहले एक गोष्ठी की बात कर…

  • 8th Feb 2018

    16. घर, शहर, दीवार, सन्नाटा- सबने हमें बांटा

    लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग। जिस प्रकार लगभग सभी के जीवन में भौतिक और आत्मिक स्तर पर घटनाएं होती हैं, जिनको शेयर करना समीचीन होता है। मैं प्रयास करूंगा कि जहाँ तक मेरी क्षमता है, मैं रुचिकर ढंग से इन घटनाओं को आपके सपने रखूं। इस क्रम में अनेक नगर, व्यक्ति और उल्लेखनीय…

  • 7th Feb 2018

    153. धूप, धुआं, पानी में

    आज एक नवगीत याद आ रहा है, नीलम सिंह जी का लिखा हुआ, यह गीत जिस समय मैंने पढ़ा था, बहुत अच्छा लगा था और आज तक याद है। इस गीत में जो मुख्यतः अभिव्यक्त किया गया है, वह यही है कि जीवन में जो कुछ झेलना पड़ता है, उसके बारे में सोचते रहें, मन…

  • 6th Feb 2018

    15. नक्काशी करते हैं नंगे जज़्बातों पर

    लीजिए पुरानी कहानी को और आगे बढ़ाते हैं, प्रस्तुत है अगला पन्ना।  दिल्ली में उन दिनों तीन-चार ही ठिकाने होते थे मेरे, जिनमें से बेशक उद्योग भवन स्थित मेरा दफ्तर एक है, उसके अलावा शाम के समय दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी या फिर कनॉट प्लेस, जहाँ अनेक साहित्यिक मित्रों से मुलाक़ात होती थी। इसके अलावा जब…

  • 5th Feb 2018

    14. इस अंधेरी कोठरी में एक रोशनदान है!

    लीजिए पुरानी कहानी का एक पन्ना और खोल रहा हूँ। जीवन में कोई कालखंड ऐसा होता है, कि उसमें से किस घटना को पहले संजो लें, समझ में नहीं आता है। अब उस समय को याद कर लेते हैं जब सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार और नाइंसाफी के विरुद्ध जयप्रकाश नारायण जी ने ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन…

  • 4th Feb 2018

    13. मंज़िल न दे, चराग न दे, हौसला तो दे

    पुरानी कहानी के पन्ने इतने रोचक हैं, कि उनको दोहराते चले जाने का मन करता है। लीजिए एक पन्ना और खोल रहा हूँ। एक नाइंसाफी तो लंबे समय से चलती चली आई है कि इतिहास को राजाओं के शासन काल से बांट दिया गया, बल्कि इतिहास का मतलब सिर्फ इतना हो गया कि किस राजा…

  • 3rd Feb 2018

    12. सफर दरवेश है ऐ ज़िंदगी….

    जीवन गाथा के शुरुआती पन्नों में से आज एक पन्ना और दोहरा रहा हूँ। दिल्ली में रहते हुए मैंने पीताम्बर बुक डिपो और दिल्ली प्रेस में दो प्राइवेट नौकरी की थीं और उसके बाद 6 वर्ष  तक उद्योग मंत्रालय में कार्य किया, जिसमें से मैं 3 वर्ष तक संसदीय राजभाषा समिति में डेपुटेशन पर भी…

  • 2nd Feb 2018

    152. ओरांगउटांग

    आज मुक्तिबोध जी की एक श्रेष्ठ रचना याद आ रही है, जिसमें विचारधाराओं के युद्ध को लेकर बड़ा सुंदर वर्णन किया गया है, वह कविता या साहित्य के क्षेत्र में हो, राजनीति में हो या किसी अन्य क्षेत्र में हो। कई बार बाद में ऐसा लगता है कि विचारधारा कहीं पीछे रह गई है और…

  • 1st Feb 2018

    मोहल्ला मेरा

    आज, मेरे शुरू के ब्लॉग पोस्ट्स में से एक पोस्ट और, जिसमें मैंने उस मोहल्ले की थोड़ी झलक दिखाई है, जिसमें मेरा बचपन बीता था। अब थोड़ा समय उस मोहल्ले को भी दे दें, जो लगभग 25 वर्ष तक मेरा ठिकाना था। जैसा मैंने अपने पिछले ब्लॉग में लिखा था, दरियागंज छोड़कर हम भोलानाथ नगर,…

  • 31st Jan 2018

    151. नाज़ था जिस पे, मेरे सीने में वो दिल ही नहीं!

      आज मुकेश जी का गाया एक बहुत प्यारा गीत याद आ रहा है। यह गीत लिखा है- जावेद अनवर जी और असद भोपाली जी ने, संगीतकार हैं- उषा खन्ना जी और गायक हैं मेरे प्रिय मुकेश जी। ऐसे गीत कुछ मौकों पर बहुत सहारा देते हैं, कुछ अंदर की  भाप निकालने के लिए, जब…

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