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3. चल अकेला
आज फिर बेधड़क, अपना शुरू का एक ब्लॉग शेयर कर रहा हूँ। हज़ारों मील लंबे रास्ते तुझको बुलाते, यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते है कौन सा वो इंसान यहाँ पर जिसने दुख ना झेला। चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला । मुकेश जी के गाये इस गीत ने जीवन में बहुत बार हिम्मत…
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150. तूने जिस फूल को पाला वो पराया होगा।
कुछ दिन से नई पोस्ट नहीं लिख रहा था, बेटे की शादी थी, सोचा कि इस बीच पुरानी पोस्ट ही शेयर कर लेता हूँ, जो जीवन के विभिन्न पड़ावों से जुड़ी हैं और मेरे दिल के बहुत क़रीब हैं। आगे भी इनको शेयर करूंगा, फिलहाल मेरा 150 वां ब्लॉग पोस्ट, जो कुछ दिन से स्थगित…
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11. हम शंटिंग ट्रेन हो गए
(पुराने ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में आज दिल्ली में प्रारंभिक नौकरी, दैनिक रेल-यात्रा आदि के कुछ अनुभव! ) पीताम्बर बुक डिपो में कुल मिलाकर मैं एक साल तक रहा, उसके बाद मैंने फैसला कर लिया कि अब यहाँ अधिक समय तक नहीं रहूंगा। अब तक इतना आत्मविश्वास आ गया था कि मैं इससे बेहतर काम…
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8. कालेज के दिन
(पुराने ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में आज प्रस्तुत है कालेज जीवन के कुछ अनुभव, यह आलेख थोड़ा लंबा और गहन है! ) बाबूराम स्कूल में 6 साल रहा और अच्छा खासा जुड़ाव रहा स्कूल से, इसलिए स्कूल के बारे में, वहाँ के शिक्षकों के बारे में भी मैंने कुछ बात की। यहाँ स्पष्ट कह…
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अमर रहे गणतंत्र हमारा
आज हमारे महान गणतंत्र की वर्षगांठ के अवसर मैं अपने सभी देशवासियों को परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की इन गीत पंक्तियों के साथ शुभकामनाएं देता हूँ तेरा गौरव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें। पुनः अनंत शुभकामनाएं।
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7. बाबूराम स्कूल
(पुराने ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में भी मैं अनुक्रम का पालन नहीं कर पा रहा हूँ, आज प्रस्तुत है स्कूल के कुछ अनुभव!) अब स्कूल के बारे में बात कर लें। कक्षा 1 से 5 तक गौशाला वाले सनातन धर्म स्कूल के बारे में तो बताने को कुछ नहीं है। बाबूराम स्कूल के बारे…
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10. रोज़गार दफ्तर की फाइलें भरें
शुरु के ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में प्रस्तुत है ये मेरा दसवां ब्लॉग। मैं 4-5 दिन तक बाहर रहा, मेरे छोटे बेटे के विवाह के सिलसिले में, सोचा था वहाँ पर रहते हुए भी, पुराने ब्लॉग्स तो दोहरा ही सकता हूँ, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया, इस बीच में कोई ब्लॉग पढ़ भी…
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9. झूमती चली हवा
अपने शुरु के ब्लॉग्स में से एक और आज दोहरा रहा हूँ, वैसे यह नौवां ब्लॉग था, और शायद शाहदरा में मेरी प्रवास अवधि के संबंध में अंतिम पड़ाव जैसा था। लगातार सीधी राह पर चलते जाने से भी काफी थकान हो जाती है, अतः थोड़ा इधर-उधर टहल लेते हैं। मैं यह भी बता दूं…
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4. इब्तदा कुछ इस तरह
अपने शुरु के ब्लॉग्स में से एक को आज दोहरा रहा हूँ, वैसे यह चौथा ब्लॉग था, लेकिन इससे मैंने क्रमशः अपनी कहानी सुनाना शुरू किया था। किसी ने फिर न सुना, दर्द के फसाने को मेरे न होने से राहत हुई ज़माने को। खैर दर्द का फसाना सुनाने का मेरा कोई इरादा नहीं है।…
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149. अंतराल- दोहराव
एक वर्ष से कुछ कम समय हुआ है, जब अचानक ब्लॉग लिखने की सनक सवार हुई थी। मैंने शुरुआत की थी, अपने जीवन के प्रारंभ से, कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं, व्यक्तियों आदि का, उनके माध्यम से मेरे जीवन पर पड़े प्रभाव आदि का ज़िक्र करते हुए। शायद 50-60 ब्लॉग, मैंने अपने जीवन के घटनाक्रम को फॉलो…