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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Mar 2018

    167. मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा!

    आज दुष्यंत कुमार जी की एक गज़ल के बहाने बात करते हैं। लगभग एक वर्ष हो गया मुझे ब्लॉग लिखते हुए, जब शुरू किया था तब मूलतः फेसबुक, ट्विटर पर निर्भर था, अब ब्लॉग लिखने वाले समुदाय के बहुत से लोग जुड़ गए हैं, ये देखकर अच्छा लगता है। कभी-कभी यह भी देखता हूँ कि…

  • 13th Mar 2018

    166. ब्रह्मराक्षस

    मुक्तिबोध जी की एक बहुत लंबी कविता है-‘ ब्रह्मराक्षस’, पहली बार बहुत पहले पढ़ी थी, जब कविताएं पढ़ा करता था। बहुत दिनों से यह कविता मन में कौंध रही थी, आज सोचा कि इसका कुछ हिस्सा आपके साथ शेयर ही कर लूं। मैं इसका संपूर्ण अर्थ समझने का दावा नहीं करता, लेकिन एक बात तो…

  • 12th Mar 2018

    165. सुन मेरे साथी रे!

    आज सचिन दा की याद आ रही है। संगीत की दुनिया में सचिन दा, अर्थात सचिन देव बर्मन जी की अलग ही पहचान थी, बाद में उनके बेटे यानि राहुल देव बर्मन जी ने अपार सफलता प्राप्त की, वास्तव में सचिन दा और आरडी (राहुल देव बर्मन) संगीत के क्षेत्र में दो अलग ज़मानों का…

  • 11th Mar 2018

    36. थोड़ी बहुत तो ज़ेहन में नाराज़गी रहे!

    जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! पश्चिमी क्षेत्र मुख्यालय, मुंबई से स्थानांतरित होकर मैंने जनवरी,2001 में उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय,लखनऊ में कार्यग्रहण किया, पिकप भवन, गोमती नगर में कार्यालय था और गोमती नगर में सहारा सिटी के पास ही गेस्ट हाउस था, जहाँ मैं लखनऊ पहुंचने पर रुका था।…

  • 9th Mar 2018

    35. जहां जाएं वहीं – सूखे, झुके मुख-माथ रहते हैं!

    जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! पश्चिम क्षेत्र मुख्यालय, मुंबई में मैंने मई 2000 में कार्यग्रहण किया, यहाँ मेरा दायित्व मुख्य रूप से जनसंपर्क का काम देखने का था। मुझे पवई क्षेत्र में 14 मंज़िला इमारत में, टॉप फ्लोर पर क्वार्टर मिला, सामने सड़क के पार पवई लेक…

  • 8th Mar 2018

    34. टूटी आवाज़ तो नहीं हूँ मैं!

    जीवन यात्रा के एक और पड़ाव के रूप में, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! अक्सर मैं ब्लॉग लिखने के बाद, सोचता हूँ कि इसमें कौन सी कविता डालनी है, क्या शीर्षक देना है। आज शुरू में ही कुछ काव्य पंक्तियां याद आ रही हैं और उनमें से ही शीर्षक भी, तो शुरू में…

  • 7th Mar 2018

    33. कैसे मनाऊं पियवा, गुन मेरे एकहू नाहीं!

    जीवन यात्रा के एक और पड़ाव के रूप में, लीजिए प्रस्तुत है, नितिन मुकेश जी के कार्यक्रम से संबंधित एक और पुराना ब्लॉग! इस प्रस्ताव को सहमति मिल गई थी कि एनटीपीसी के स्थापना दिवस के अवसर पर, विंध्याचल परियोजना में नितिन मुकेश जी, अथवा दो-तीन फिल्मी गायक और थे, उनमें से किसी एक को…

  • 6th Mar 2018

    32. मैं बोला मैं प्रेम दिवाना इतनी बातें क्या जानूं।

    जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! विंध्याचल परियोजना में 12 वर्ष का प्रवास, बहुत घटनापूर्ण था और निराशा भी बहुत बार हुई इस दौरान। एक पदोन्नति समय पर मिल गई, जिससे भद्रजनों की भृकुटियां तन गईं, हिंदी अधिकारी और समय पर पदोन्नति, इसके बाद उन्होंने भरपूर कोशिश की…

  • 4th Mar 2018

    31. नींद भी खुली न थी, कि हाय धूप ढल गई !

    जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! विंध्याचल परियोजना में प्रवास का ब्यौरा और ज्यादा लंबा नहीं चलेगा, अब इसको जल्दी ही समाप्त करना होगा। कवि सम्मेलनों जो कुछ अपनी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ उसका ज़िक्र कर लेता हूँ। यह मेरा सौभाग्य ही था कि उस समय जहाँ…

  • 3rd Mar 2018

    30. कभी फुर्सत में कर लेना हिसाब, आहिस्ता-आहिस्ता!

    जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! एनटीपीसी की सभी परियोजनाओं की तरह, विंध्याचल परियोजना में भी स्थापना दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष 7 नवंबर को बड़ा आयोजन किया जाता है। जैसा मैंने बताया इन आयोजनों में अभिजीत, अनूप जलोटा तथा जगजीत सिंह जैसे बड़े कलाकार आ चुके थे।…

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