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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Mar 2018

    177. पेपर लीक बनाम स्किल डेवलपमेंट

    दिल्ली में सीबीएसई के कुछ पेपर लीक होने की घटना बहुत खेदजनक है और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। यह प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है। वर्तमान व्यवस्था के रहते इसमें सुधार की संभावना नजर नहीं आ रही है। आइए विचार करें कि इस प्रकार की घटनाएं आखिर क्यों बढ़ रही हैं। युवाओं के…

  • 29th Mar 2018

    44. रोशनी के साथ हंसिए बोलिये!

    लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- संक्रमण काल है, सामान जा चुका, अब अपने जाने की बारी है। ऐसे में भी मौका मिलने पर बात तो की जा सकती है। समय है गुड़गांव से गोआ शिफ्ट होने का, गुड़गांव के साथ 7 वर्ष तक पहचान जुड़ी रही, अब गोआ अपना ठिकाना…

  • 28th Mar 2018

    176. ज़िंदगी काहे को है, ख्वाब है दीवाने का !

    आज सोचा कि ज़िंदगी के बारे में बात करके, ज़िंदगी को उपकृत कर दें। शुरू में डॉ. कुंवर बेचैन जी की पंक्तियां याद आ रही हैं, डॉ. बेचैन मेरे लिए गुरू तुल्य रहे हैं और उनकी गीत पंक्तियां अक्सर याद आ जाती हैं- ज़िंदगी का अर्थ मरना हो गया है, और जीने के लिए हैं…

  • 27th Mar 2018

    175. लाख यहाँ झोली फैला ले …

    आज किशोर दा का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ, फिल्म-फंटूश से, इसे लिखा है साहिर लुधियानवी जी ने और संगीतकार हैं- सचिन देव बर्मन जी। यही दुनिया है जिसमें हमें रहना होता है, और कहाँ जाएंगे, लेकिन एक तो कुछ लोगों के जीवन में परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं, और फिर जब इस…

  • 26th Mar 2018

    43. रात लगी कहने सो जाओ देखो कोई सपना!

    आज फिर नया कुछ लिखने का मन नहीं है, ऐसे में सर्वश्रेष्ठ विकल्प यही है, जब तक पुराना माल बाकी हो, कि कोई पुरानी आइटम निकालो और झाड़-पोंछकर प्रस्तुत कर दो। आज भी वही कर रहा हूँ। प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- मैंने पिछले 42 दिनों में, अपने बचपन से लेकर वर्ष 2010 तक,…

  • 25th Mar 2018

    174. जैसे बहते हुए पानी पे हो ‘पानी’ लिखना

    डॉ. कुंवर बेचैन जी की गीत पंक्तियां याद आ रही हैं- दिल पे मुश्किल है बहुत, दिल की कहानी लिखना जैसे बहते हुए पानी पे हो, पानी लिखना। बहता हुआ पानी गतिशीलता का, जीवंतता का और सरसता का प्रतीक है। शुरू से ही नदियों के किनारे नगर बसते आए हैं, सभ्यताओं का विकास हुआ है।…

  • 25th Mar 2018

    42. एक तो तेरा भोलापन है, एक मेरा दीवानापन!

    यादों के समुंदर से एक और मोती, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! मैंने लखनऊ प्रवास का ज्यादा लंबा ज़िक्र नहीं किया और ऊंचाहार के सात वर्षों को तो लगभग छोड़ ही दिया, क्योंकि मुझे लगा कि जो कुछ वहाँ हुआ, वह पहले भी हो चुका था। राजनीति की कोई कितनी बात करेगा! ऊंचाहार…

  • 24th Mar 2018

    173. फसल काटती लड़की का गीत

    आज विलियम वर्ड्सवर्थ की एक प्रसिद्ध कविता का सहज अनुवाद, हिंदी में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ। यह अत्यंत प्रसिद्ध रचना है, संभव है इस अनुवाद में कोई कमी रह गई हो, क्योंकि कविता के अर्थ-विस्तार को समझना और फिर उसे पुनः सृजित करना उतना आसान तो नहीं होता, कोई कमी रह गई…

  • 23rd Mar 2018

    172. आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे!

    सूरज सनीम जी का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ जिसे ज़नाब तलत अजीज़ ने फिल्म- डैडी के लिए गाया है और यह गीत अनुपम खेर जी पर बड़ी सुंदरता से और खूबसूरत संदर्भ में फिल्माया गया है। कुल मिलाकर बात इतनी है  कि हम ज़िंदगी में जो पाना चाहते हैं, उसे पाने के…

  • 23rd Mar 2018

    41. मधु का सागर लहराता था…!

    यादों के समुंदर से एक और मोती, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! मैंने कितनी नौकरियों और अलग-अलग स्थानों पर तैनाती के बहाने से अपनी राम-कहानी कही है, याद नहीं। लेकिन आज दो नौकरियों की याद आ रही है, जिनका ज़िक्र नहीं हुआ। जाहिर है ये काम मैंने शुरू के समय में, बेरोज़गार रहते…

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