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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Apr 2018

    47. छाया मत छूना मन, होगा दुख दूना मन !

    आज फिर से आसान वाला रास्ता चुनता हूँ, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- हाल में हुई एक घटना पर टिप्पणी करने का मन हो रहा है। इस घटना के पात्र हैं सदी के महानायक श्री अमिताभ बच्चन और आज के लोकप्रिय कवि डॉ. कुमार विश्वास । घटना के बारे में चर्चा करने से…

  • 6th Apr 2018

    46. मेरा खयाल है आईने पर गया हूँ मैं!

    बहुत से ऐसे ब्लॉग हैं, कि जब मैंने उनको लिखा था, तब उनको पढ़ने वाले ब्लॉगर साथियों से मेरा संपर्क नहीं हुआ था, इसीलिए लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- इस बीच हम गुड़गांव छोड़कर गोआ में आ बसे। यह हमारा नया ठिकाना है और मुझे अभी तक भ्रम रहता है…

  • 5th Apr 2018

    183. इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं!

    आज स्व. ओम प्रकाश ‘आदित्य’ जी की एक कविता याद आ रही है, जिसके अंत में कवि कहता है कि वो नशे में यह सब कुछ कह गया है, सही बात है, ऐसा नहीं कहेगा तो उस पर कितने सारे मानहानि कि मुकद्मे नहीं हो जाएंगे!  लेकिन सच है कि आज के देश के हालात…

  • 4th Apr 2018

    182. टूट जाते हैं जहाँ पर ग्लोब के धागे…

    श्री रमेश रंजक जी के एक गीत की पंक्तियां हैं- पेट की पगडंडियों के जाल से आगे, टूट जाते हैं जहाँ पर ग्लोब के धागे, मनुजता की उस सतह पर छोड़ जाते हैं, दिन हमें जो तोड़ जाते हैं, वो इकहरे आदमी से जोड़ जाते हैं। इस कविता में मुख्यतः कहा यही गया है कि…

  • 4th Apr 2018

    181. तुम तरस नहीं खाते, बस्तियाँ जलाने में!

    आज डॉ. बशीर बद्र की एक गज़ल याद आ रही है। बशीर बद्र जी शायरी में एक्सपेरिमेंट करने के लिए जाने जाते हैं और काफी नये किस्म के शेर, रवायत से हटकर लिखते रहे हैं। आज की गज़ल का असल में पहला शेर याद आया था, क्योंकि गज़ल में तो यह संभव है कि हर…

  • 3rd Apr 2018

    180. मार्ग जिस पर चला नहीं कोई!

    आज रॉबर्ट फ्रॉस्ट की लिखी प्रसिद्ध अंग्रेजी कविता ‘द रोड नॉट टेकन’ का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यदि कहीं मूल कथ्य के साथ न्याय न हो पाया हो तो पहले ही क्षमा चाहता हूँ, पर उसके कारण मैं मानता हूँ कि महान रचनाओं के अनुवाद का प्रयास करने संबंधी मेरे उत्साह पर कोई…

  • 2nd Apr 2018

    179. मैं वो एक मुश्त-ए-गुबार हूँ!

    आज एक प्रसिद्ध गज़ल के बारे में बात कर लेते हैं, जिसके बारे में बहुत से लोग कहते हैं कि यह बहादुर शाह ज़फर साहब की लिखी हुई है, लेकिन यह वास्तव में  मुज़्तर ख़ैराबादी जी ने लिखी थी, जो जावेद अख्तर जी के दादा तथा जां निसार अख्तर साहब के पिता थे। इस गज़ल को रफी…

  • 1st Apr 2018

    45. हर कोई अपनी ही आवाज़ से कांप उठता है !

    लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- (यह ब्लॉग मैंने गुड़गांव से गोआ शिफ्ट होने से पहले लिखा था)। हाँ तो कहाँ जाना है- गोआ! जो एक पर्यटक के रूप में वहाँ गए हैं, उनके मन में एक छवि होगी गोआ की, लेकिन वहाँ रहने वाले के लिए तो गोआ कुल मिलाकर,…

  • 31st Mar 2018

    178. पुरस्कार के बहाने!

    कभी कभी कुछ अलग लिखने का मन करता है, आज इसके लिए मुझे बहाना भी मिल गया क्योंकि ब्लॉग लेखन संबंधी एक एवार्ड के लिए मेरा नॉमिनेशन हो गया। मैंने, सेवानिवृत्ति से पूर्व, 22 वर्ष तक सार्वजनिक क्षेत्र की एक महानवरत्न कंपनी में काम किया, बहुत सी बार अपने ब्लॉग्स में कंपनी का नाम लिखा…

  • 30th Mar 2018

    THE VERSATILE BLOGGER AWARD

    THE VERSATILE BLOGGER AWARD It was a great surprise for me when today I came to know that sh. Krishna Kumar Lakhotia Ji has nominated me for The Versatile Bloggers Award. Sh. Lakhotia’s blog is titled as “kishanlakhotia(Meditation Now or Never).” and his website is http://www.krishnalakhotia.com. Sh. Lakhotia Ji writes very useful and enlightening blogs…

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