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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th May 2018

    203. चराग़ों को जलाने में जला ली उंगलियाँ हमने!

    आज इंसान की ज़िंदगी में जहाँ साधन संपन्नता बढ़ती जा रही है, वहीं प्रतियोगिता भी बढ़ रही है, जो साइकिल पर है उसे स्कूटर, मोटरसाइकिल की ललक है, जो इन पर उसका ध्यान कार पर टिका है और कार लेने के बाद मेरे भाई कोई एक मॉडल थोड़े ही है, ये मॉडल तो कुछ लाख…

  • 13th May 2018

    68. हाय रे हाय ओ दुनिया हम तेरी नज़र में आवारे!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग – एक फिल्मी गाना याद आ रहा है, फिल्म थी- मैं नशे में हूँ, यह गीत राज कपूर पर फिल्माया गया है, शैलेंद्र जी ने लिखा है, शंकर जयकिशन का संगीत और आवाज़ है मेरे प्रिय गायक मुकेश जी की। बोल हैं- हम हैं तो चांद…

  • 12th May 2018

    67. इसलिए धर्म को प्यार बना!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग, इसमें जिस बाबा की बात की गई है, असल में उसके बाद एक और बाबा को सज़ा हो चुकी है – एक बाबा को सज़ा का ऐलान होने वाला है। अच्छा नहीं लगता कि बाबाओं को इस हालत से गुज़रना पड़े। हमारे देश में परंपरा रही…

  • 11th May 2018

    66. न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किसका था!

    आज कुछ गज़लें, कवितायें जो याद आ रही हैं, उनके बहाने बात करूंगा। एक मेरे दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी की शनिवारी सभा के साथी थे- राना सहरी, जो उस समय लिखना शुरू कर रहे थे, बाद में उनकी लिखी कुछ गज़लें जगजीत सिंह जी ने भी गाईं, उनमें से ही एक को याद कर रहा हूँ।…

  • 10th May 2018

    65. चंदू के चाचा, चांद पर!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- आज भारत के एक महान कैरेक्टर के बारे में बात कर रहा हूँ, जिन्हें अपनी तारीफ एकदम पसंद नहीं है, लेकिन उनमें गुण इतने हैं कि मेरा मन हो रहा है कि आज उनके बारे में बात कर ही लें। आपने यह दृष्टांत तो सुना ही…

  • 9th May 2018

    202. हम अपने बुज़ुर्गों का ज़माना नहीं भूले!

    आज एक छोटी सी गज़ल सागर आज़मी जी की लिखी हुई शेयर करने का मन हो रहा है, जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया है। आज जबकि ऐसा माहौल है कि लोग किसी न किसी बहाने से नफरत फैलाने के काम में लगे हैं, इस प्रकार की गज़लें, कविताएं अच्छा संदेश देती हैं। इसमें उन…

  • 8th May 2018

    64. आनंदोत्सव!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- मैंने तीन दिनों तक चले श्री श्री रविशंकर जी द्वारा संचालित आनंदोत्सव में भाग लिया। ऐसे शिविर उनकी संस्था- ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ द्वारा आयोजित किए जाते रहते हैं, लेकिन जैसा मुझे बताया गया, 30 वर्षों के इन शिविरों के इतिहास में यह तीसरी बार था कि…

  • 7th May 2018

    63. आस्था के नगीने फक़त कांच हैं!

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- आज सोशल मीडिया के बारे में बात कर लेता हूँ, ये ब्लॉग लिखने का मेरा उद्देश्य यही है कि मैं विभिन्न विषयों पर अपने विचारों को संकलित कर लूं और उसके बाद यदि कभी ऐसा मन बने तो इनमें से…

  • 6th May 2018

    201. देख लो क्या असर, कर दिया प्यार के नाम ने!

    एक साथी ब्लॉगर की ब्लॉग पोस्ट पढ़ी जो एक बॉस के बारे में थी, जो रिटायर होने के बाद अपने जूनियर के अधीन कुछ समय तक ‘एडवाइज़र’ के रूप में काम करते हैं, लेकिन बाद में वे यह महसूस करते हैं कि वहाँ स्वाभिमान की रक्षा करते हुए काम करते रहना संभव नहीं है और…

  • 5th May 2018

    62. वह जो नाव डूबनी है मैं उसी को खे रहा हूँ !

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- जिस प्रकार मौसम पर बात करना बहुत आसान सा काम होता है, टाइम पास वाला काम, अगर आप इसको भी काम कहना चाहें, उसी प्रकार अपने मुहल्ले के बारे में बात करना भी एक अच्छा टाइम-पास होता था, विशेष रूप…

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