-
200. मैं अपने घर से चल पड़ा!
आजकल काफी पुराने ब्लॉग दोहराता रहा हूँ, लेकिन फिर भी यह 200 वां ब्लॉग आ ही गया, एक यह भी डबल सेंचुरी हुई ना! कोई भी क्षेत्र हो, हम अक्सर कोई सपना पालकर उसके पीछे चलते जाते हैं। एक गीत की पंक्ति है-‘ एक छलिया आस के पीछे दौड़े तो यहाँ तक आए’ अथवा ‘वो…
-
61. अरुण यह मधुमय देश हमारा !
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है, पिछले वर्ष स्वाधीनता दिवस पर लिखा गया एक और पुराना ब्लॉग- आज याद आ रहा है, शायद 27 वर्ष तक, मैं स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर संदेश तैयार किया करता था, ये संदेश होते थे पहले 5 वर्ष (1983 से 1987)…
-
60. बच्चों के लिए जो धरती मां, सदियों से सभी कुछ सहती है!
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- सभी को समान अवसर मिले, यह कम्युनिस्टों का नारा हो सकता है, लेकिन इस विचार पर उनका एकाधिकार नहीं है। भारतीय विचार इससे कहीं आगे की बात करता है, हम समूचे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। एक विचार जो…
-
58. वहाँ पैदल ही जाना है…..!
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज ऐसे ही, गीतकार शैलेंद्र जी की याद आ गई। मुझे ये बहुत मुश्किल लगता है कि किसी की जन्मतिथि अथवा पुण्यतिथि का इंतज़ार करूं और तब उसको याद करूं। मैंने कहीं पढ़ा था कि शैलेंद्र जी इप्टा से जुड़े…
-
57. जब से गए हैं आप, किसी अजनबी के साथ!
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज एक बार फिर संगीत, विशेष रूप से गज़ल की दुनिया की बात कर लेते हैं। भारतीय उप महाद्वीप में जब गज़ल की बात चलती है तब अधिकतम स्पेस गुलाम अली जी और जगजीत सिंह जी घेर लेते हैं। हालांकि…
-
199. हम जिस तरफ़ चले थे उधर रास्ता न था!
हमारे एक प्रसिद्ध फिल्मी अभिनेता, निर्माता, निर्देशक हुए हैं, अभी वे सक्रिय नहीं हैं, ईश्वर उनको लंबी उम्र दे, वे हैं- श्री मनोज कुमार। फिल्म निर्माता के रूप में उन्होंने एक विशेष विषय पर फिल्में बनाई- देशप्रेम और देशभक्ति। उनकी फिल्म के एक गीत की पंक्ति है- है प्रीत जहाँ की रीत सदा, मैं गीत…
-
198. जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षण और इससे बचाव!
यह आलेख लिखा था एक उत्पाद का प्रचार करने की दृष्टि से, लेकिन मालूम हुआ कि उत्पादक को इसकी आवश्यकता नहीं है। अब लिखा गया है तो शेयर कर ही लेता हूँ, संभव है किसी के काम आ जाए, हाँ उस उत्पाद के प्रचार वाला भाग इससे निकाल दिया है! मनुष्य जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं…
-
56. दैर-ओ-हरम में बसने वालो !
आज फिर से, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- यह जानकर, हर किसी को अच्छा लगता है कि कुछ लोग हमको जानते हैं। लेकिन दुनिया में हर इंसान अलग तरह का है, कितने लोग वास्तव में ऐसे होते हैं, जो किसी व्यक्ति को ठीक से जानते हैं। कुछ लोग हैं, जो हमारे साथ मुहल्ले…
-
197. अपने घर के लिए, इंटीरियर डिजाइनर क्यों?
(Advantages of Hiring an Interior Designer and Architect for Your New Home) ID Prop –Details आप अपना नया घर बनवाते हैं, पुराने घर का नवीकरण कराते हैं, तब यह क्यों जरूरी है कि आप इंटीरियर डिजाइनर की सेवाएं प्राप्त करें? एक बात तो आप मानेंगे कि इंसान के जो सबसे बड़े सपने होते हैं जीवन…
-
196. ये न होता तो क्या होता!
#AlterationsToLife IndiSpire पर दिए गए संदर्भ से प्रेरणा लेते हुए आज का आलेख लिख रहा हूँ। लेकिन मैं उन प्रसंगों का ही उल्लेख कर रहा हूँ जिनसे मेरे जीवन, मेरे करियर को सकारात्मक दिशा मिली है। ऐसे प्रसंग नहीं हैं जिनके बारे में मैं नकारात्मक रूप में लिख सकूं। मैंने अपने शुरू के ब्लॉग्स में…