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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Jun 2017

    33. कैसे मनाऊं पियवा, गुन मेरे एकहू नाहीं।

    इस प्रस्ताव को सहमति मिल गई थी कि एनटीपीसी के स्थापना दिवस के अवसर पर, विंध्याचल परियोजना में नितिन मुकेश जी, अथवा दो-तीन फिल्मी गायक और थे, उनमें से किसी एक को चुनकर आमंत्रित किया जाए, इसके लिए तीन सदस्यों की एक समिति को मुंबई भेजा गया, इसमें मेरे अलावा एक कर्मचारी कल्याण परिषद के…

  • 14th Jun 2017

    32. मैं बोला मैं प्रेम दिवाना इतनी बातें क्या जानूं।

    विंध्याचल परियोजना में 12 वर्ष का प्रवास, बहुत घटनापूर्ण था और निराशा भी बहुत बार हुई इस दौरान। एक पदोन्नति समय पर मिल गई, जिससे भद्रजनों की भृकुटियां तन गईं, हिंदी अधिकारी और समय पर पदोन्नति, इसके बाद उन्होंने भरपूर कोशिश की कि कोई पदोन्नति समय पर न मिल पाए। कुछ बौने सीढ़ियों पर काफी…

  • 13th Jun 2017

    31. नींद भी खुली न थी, कि हाय धूप ढल गई, पांव जब तलक उठे, कि ज़िंदगी फिसल गई,

     विंध्याचल परियोजना में प्रवास का ब्यौरा और ज्यादा लंबा नहीं चलेगा, अब इसको जल्दी ही समाप्त करना  होगा। कवि सम्मेलनों जो कुछ अपनी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ उसका ज़िक्र कर लेता हूँ। यह मेरा सौभाग्य ही था कि उस समय जहाँ नीरज जी जैसे महान गीतकार से निकट परिचय हो गया था, वहीं सोम…

  • 12th Jun 2017

    30. कभी फुर्सत में कर लेना हिसाब, आहिस्ता-आहिस्ता।

    एनटीपीसी की सभी परियोजनाओं की तरह, विंध्याचल परियोजना में भी स्थापना दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष 7 नवंबर को बड़ा आयोजन किया जाता है। जैसा मैंने बताया इन आयोजनों में अभिजीत, अनूप जलोटा तथा जगजीत सिंह जैसे बड़े कलाकार आ चुके थे। जगजीत सिंह के कार्यक्रम के समय तो अलग ही माहौल था। विशाल स्पोर्ट्स…

  • 11th Jun 2017

    29. मत लाओ नैनों में नीर कौन समझेगा, एक बूंद पानी में एक वचन डूब गया।

    अब विंध्याचल परियोजना के क्लबों का ज़िक्र कर लेते हैं। दो क्लब थे वहाँ पर, वीवा क्लब (विंध्याचल कर्मचारी कल्याण क्लब) और विंध्य क्लब। वहाँ समय-समय पर होने वाली सांस्कृतिक गतिविधियों के अलावा, हिंदी अनुभाग की ओर से कभी-कभी कवि गोष्ठियों का आयोजन भी हम वहाँ करते थे। अधिक प्रतिभागिता वाले कार्यक्रम तो रूसी प्रेक्षागृह…

  • 10th Jun 2017

    28. मन कस्तूरी हिरण हो गया, रेत पड़ी मछली निंदिया!

    चलिए आगे बढ़ने से पहले नंद बाबा का थोड़ा सम्मान कर लेते हैं। नंद बाबा, मां-बाप ने इनका नाम रखा था –सच्चिदानंद, इन्होंने बाद में अपनाया एस. नंद और जनता ने प्यार से इनको कहा- नंद बाबा। कारण जो भी रहे हों, विंध्याचल परियोजना में कार्यग्रहण करते ही इनकी महाप्रबंधक महोदय से बिगड़ गई। वैसे…

  • 9th Jun 2017

    27. जय गुरूदेव!

    विंध्याचल परियोजना में मेरा प्रवास 12 वर्ष का रहा, जो सेवा के दौरान किसी एक स्थान पर सबसे अधिक है, और एनटीपीसी में 22 वर्ष की कुल सेवा भी किसी एक संस्थान में सबसे लंबी सेवा थी। इससे यह भी सिद्ध हो गया कि मुझ जैसा चंचल चित्त व्यक्ति भी कहीं दीर्घ सेवा सम्मान पा…

  • 8th Jun 2017

    26. इन्हें प्रणाम करो ये बड़े महान हैं!

    विंध्याचल परियोजना में शुरू के 3-4 साल बड़े सुकून और आनंद के साथ बीते, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां, स्कूलों की प्रगति के लिए पुस्तकों और सामग्रियों का प्रबंध, खेलकूद, कवि सम्मेलन आदि। सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन में भी मेरी ऐसी भूमिका बन गई कि एकाध बार ऐसा कोई आयोजन हुआ और मैं बाहर रहा तो…

  • 7th Jun 2017

    25. अखबारों में, सेमीनारों में, जीता है आम आदमी!

    जैसा कि मैंने बताया, अब बारी थी मेरे सेवाकाल के अंतिम नियोजक, एनटीपीसी लिमिटेड के साथ जुड़ने की, जहाँ मेरी सेवा भी सबसे लंबी रही। 21 मार्च, 1988 को मैंने एनटीपीसी की विंध्याचल परियोजना में कार्यग्रहण किया, यहाँ मुझे सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन और संचालन का भरपूर अवसर मिला, प्रेम करने वाले ढ़ेर सारे लोग…

  • 6th Jun 2017

    24. और चुकने के लिए हैं, ऋण बहुत सारे!

    अब बारी थी, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की ही एक इकाई, खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स में कुछ समय प्रवास की, जयपुर के बाद एक बार फिर से राजस्थान में रहने का अवसर मिला था। राजस्थान के लोग बहुत प्रेम करने वाले हैं। लेकिन यह इकाई क्योंकि दिल्ली और जयपुर, दोनों के बहुत नज़दीक है इसलिए यहाँ राजनीति…

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