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243. तंजानिया, दार-अस-सलाम भ्रमण-1
चलिए अब तंजानिया भ्रमण की बात कर लेते हैं। जैसा मैंने बताया, ‘दार-अस-सलाम’ में भी बहुत सुंदर ‘बीच’ हैं, अच्छे मॉल हैं, जिनमें जाकर लगता है कि हम भारत के ही किसी मॉल में हैं। कुछ समुद्र तट के सफेद रेत वाले क्षेत्र भी हैं, जो काफी आकर्षक हैं, सड़क के किनारे पर कई…
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242. दार-अस-सलाम – तंजानिया!
यूएई में दुबई, शारजाह आदि देखने के बाद बारी थी, अगली मंजिल दार-अस सलाम की ओर बढ़ने की! दिल्ली से जाते समय ही हमने फ्लाइट की सभी टिकट बुक करा रखी थीं तथा दार-अस-सलाम के लिए एतिहाद एयरलाइंस की हमारी फ्लाइट आबू धाबी से थी, जबकि हम शारजाह में रह रहे थे। हमारे पास…
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241. दुबई प्रवास – चित्रों की ज़ुबानी!
शारजाह-दुबई यात्रा के बारे में जो मुझे याद आया वह मैंने पिछली ब्लॉग पोस्ट्स में लिख दिया, अब कुछ कहानी चित्रों के माध्यम से- नीचे बाएं- दुबई मॉल में बुर्ज खलीफा का मॉडल और दाएं दुबई मॉल के ऊपर से बगल के प्ले-एरिया का दृश्य। शारजाह कॉर्निश का एक और चित्र । नीचे होटल…
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240. दुबई प्रवास कुछ और पड़ाव!
शारजाह-दुबई यात्रा की कुछ और यादें हैं जो अभी शेयर करनी हैं। एक तो जैसे मैंने पहले कहा, जंगल में मंगल कैसे होता है, इसका ज्वलंत उदाहरण वहाँ रेगिस्तान में सुंदर सड़कें और इमारतें बनाकर प्रस्तुत किया गया है। एक फर्क़ जो मैंने यहाँ के मुकाबले वहाँ पर देखा, वहाँ मस्ज़िदों के किनारों पर दो…
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239. दुबई-शारजाह!
शारजाह-दुबई यात्रा का विवरण, जितना कुछ अब तक याद है वो देने का प्रयास कर रहा हूँ। मैं यह नहीं चाहता कि मेरा दिया हुआ विवरण पर्यटन विभाग द्वारा बनाई गई प्रचार पुस्तिका जैसा बनकर रह जाए, इस यात्रा में हमारी जीवंत उपस्थिति तो जरूरी है। हाँ तो हमारी घड़ी डेढ़ घंटा पीछे हो गई…
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238. मेरा पहला विदेश प्रवास-शारजाह-दुबई !
अभी हाल ही में मैंने अपने एक महीने के लंदन प्रवास के बारे में लिखा, तो फिर खयाल आया कि यूएई, और तंजानिया ने क्या गलती की थी, जो उनको ‘कवर’ न किया जाए। ये यात्रा शायद तीन वर्ष पहले की गई थी और उस समय मैं ब्लॉगिंग जैसा कर्म नहीं करता था। ठीक है…
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237. ब्लॉग पर चर्चा!
अपनी ब्लॉग पोस्ट में, आज ब्लॉग लेखन के बारे में ही चर्चा करना चाहूंगा। जैसा कि ब्लॉग पोस्ट पर दिए गए नंबर से पता चलता है, ये मेरी 237 वीं पोस्ट है। बीच-बीच में मैं पुरानी पोस्ट दोहराता भी रहता हूँ, क्योंकि शुरु में मेरी पोस्ट को पढ़ने वाले भी अधिक नहीं थे। लेकिन यह…
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103. किसी का प्यार क्या तू, बेरुखी को तरसे!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज धर्मेंद्र जी के बारे में बात करने का मन हो रहा है। वैसे कोई किसी का नाम ‘धर्मेंद्र’ बताए तो दूसरा पूछता इसके आगे क्या है, शर्मा, गुप्ता, वर्मा, क्या? मगर अभिनेता धर्मेंद्र के लिए इतना नाम ही पर्याप्त है।वैसे उनके बेटों के नाम…
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236. चार किताबें पढ़कर ये भी, हम जैसे हो जाएंगे!
निदा फाज़ली साहब की एक गज़ल है- तन्हा तन्हा दुख झेलेंगे महफ़िल महफ़िल गाएँगे जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनाएँगे। यह गज़ल पहले भी शायद मैंने शेयर की है, आज इस गज़ल का एक शेर खास तौर पर याद आ रहा था- बच्चों के छोटे हाथों को, चांद सितारे छूने दो, चार…
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102. फिर ख़्वाब अगर हो जाओ तो क्या!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- एक गज़ल है उबेदुल्लाह अलीम जी की, गुलाम अली जी ने डूबकर गाई है जो बहुत बार सुनी है, बहुत अच्छी लगती है। कुल मिलाकर धार्मिक अंदाज़ में, इसको भी जीवन की नश्वरता से जोड़ा जा सकता है, लेकिन यह कि इस ज़िंदगी को, जो…