-
जीवन से ले गया वो!
अब क्या है अर्थ-हीन सी पुस्तक है ज़िंदगी,जीवन से ले गया वो कई दिन निकाल के| कृष्ण बिहारी नूर
-
मौसम दो ही इश्क़ के!
मौसम हैं दो ही इश्क़ के सूरत कोई भी हो,हैं उस के पास आइने हिज्र-ओ-विसाल के| कृष्ण बिहारी नूर
-
यात्राएं!
प्रस्तुत है मेरी आज की रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- आना-जाना, जाना-आनाआज यहाँ, कल वहाँ ठिकाना। फिर से लगते बैग-अटैचीटूथ ब्रश, रेजर और कैंची,मोबाइल, चार्जर न भूलनालैपटॉप बाहर ही रखना। घड़ी, बेल्ट के साथ इन्हें भीएयरपोर्ट पर पड़े दिखाना। बार-बार रूटीन बदलतासाथ दवा का झोला चलता, धैर्य सहित तैयारी करनाकाम न आएगी चंचलता, जहाँ…
-
सौदा जो करना!
पिछले जन्म की गाढ़ी कमाई है ज़िंदगी,सौदा जो करना करना बहुत देख-भाल के| कृष्ण बिहारी नूर
-
ऐ मेरी आरज़ू मुझे!
ऐसा न हो गुनाह की दलदल में जा फँसूँ, ऐ मेरी आरज़ू मुझे ले चल सँभाल के| कृष्ण बिहारी नूर
-
लफ़्ज़ों के ये नगीने!
लफ़्ज़ों के ये नगीने तो निकले कमाल के,ग़ज़लों ने ख़ुद पहन लिए ज़ेवर ख़याल के| कृष्ण बिहारी नूर
-
मीर-ए-कारवाँ मैं हूँ!
गर्द-ए-राह की सूरत साँस साँस है ऐ ‘नूर’,मीर-ए-कारवाँ मैं हूँ क़ाफ़िला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
-
होता है रोज आत्मदाह
यू ट्यूब पर – मेरा नया गीतहोता है रोज आत्मदाह https://youtu.be/vzr1B7_R-Z4?si=-ufQqbPkSIErZTWmआप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा।
-
चेहरा चेहरा पढ़ लीजे!
अपनी अपनी ताबीरें ढूँढता है हर चेहरा,चेहरा चेहरा पढ़ लीजे तज़्किरा है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर