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रौशनी अंधेरे का विलोम नहीं होती!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि कुमारेंद्र पारस नाथ सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है कुमारेंद्र पारस नाथ सिंह जी की यह कविता- यहाँ से वहाँ तक दौड़ती रहती है।कभी-कभीजब बहुत घना हो जाता है अंधेरा,लगता है,/ नहीं है–…