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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Mar 2026

    हम अजनबी की तरह!

    ज़बाँ हमारी न समझा यहाँ कोई ‘मजरूह’,हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 22nd Mar 2026

    चूड़ी नहीं ये मेरा दिल है!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में गैम्बलर फिल्म के लिए किशोर कुमार जी का गाया यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे नीरज जी ने लिखा था और इसका संगीत सचिन देव बर्मन जी ने तैयार किया था- चूड़ी नहीं ये मेरा दिल है, देखो देखो टूटे ना! आशा है…

  • 22nd Mar 2026

    एक चिड़िया आई!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अनूप अशेष जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। अनूप जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अनूप अशेष जी की यह कविता– जिस दिन मेरे घरएक चिड़ियाआई पंख फुलाए। मैंने देखा वह दिनमेरे मन का…

  • 21st Mar 2026

    लहू हिना नहीं बनता!

    सरिश्क रंग न बख़्शे तो क्यूँ हो बार-ए-मिज़ा, लहू हिना नहीं बनता तो क्यूँ बदन में रहे| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 21st Mar 2026

    शोख़ की नज़र में खुले!

    खुले जो हम तो किसी शोख़ की नज़र में खुले,हुए गिरह तो किसी ज़ुल्फ़ की शिकन में रहे| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 21st Mar 2026

    जूता चल गया!

    एक पुराने शेर के बहाने, आज के समय पर संक्षिप्त वक्तव्य- आशा है आपको पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 21st Mar 2026

    तिरी निगाह का जादू!

    मुझे नहीं किसी उसलूब-ए-शाइरी की तलाश,तिरी निगाह का जादू मिरे सुख़न में रहे|‘ मजरूह सुल्तानपुरी

  • 21st Mar 2026

    नादां था बेचारा दिल ही तो है!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से कल मैंने फिल्म- ‘दिल ही तो है’ के लिए इसके शीर्षक से संबंधित एक मस्ती भरा गीत प्रस्तुत किया था, आज उसके विपरीत निराशा और पछतावे से भरा गीत मेरे स्वर में प्रस्तुत है, इस गीत को भी मुकेश जी ने गाया था, लिखा था साहिर लुधियानवी जी ने…

  • 21st Mar 2026

    मिरे जुनूँ की महक!

    तू ऐ बहार-ए-गुरेज़ाँ किसी चमन में रहे,मिरे जुनूँ की महक तेरे पैरहन में रहे| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 21st Mar 2026

    अंतिम पर्दा – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद…

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