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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Jul 2019

    यह तो कहो किसके हुए!

    आज फिर से एक बार, मेरे प्रिय मंचीय कवियों में से एक स्व. भारत भूषण जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। उनका यह गीत भी मुझे विशेष रूप से प्रिय है, इस गीत में कवियों और विशेष रूप से मंचीय कवियों की व्यथा की अभिव्यक्ति की गई है और यह पूछा गया कि…

  • 19th Jul 2019

    मेरी कब्र के पास खड़े मत रहो, आंसू न बहाओ!

    आज मैं विख्यात अमेरिकी कवियित्री मैरी एलिज़बेथ फ्राये की एक  प्रसिद्ध कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए…

  • 18th Jul 2019

    सकल सुमंगल दायक, रघुनायक गुणगान।

    लीजिए अब हम गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करने के सिलसिले के समापन की ओर बढ़ रहे हैं। जैसा मैंने पहले भी कहा है, मेरी यह प्रस्तुति मुकेश जी द्वारा गये गए अंश में से जितना मुझे याद है, उस पर आधारित है। कल के प्रसंग में…

  • 17th Jul 2019

    तासु दूत मैं जा करि, हरि आनेहु प्रिय नारि।

    गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करने का सिलसिला शायद दो दिन और चलेगा। मैं मुकेश जी द्वारा गये गए अंश में से ही जितना मुझे याद आ रहा है वह मैं यहाँ दे रहा हूँ। कल के प्रसंग में सीता माता को श्रीराम जी की निशानी देकर,…

  • 16th Jul 2019

    चकित चितव मुदरी पहिचानी!

    गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करने के क्रम में कल हनुमान जी ने लंकिनी से निपटने के बाद उसकी शुभकामनाएं प्राप्त कर ली थीं और इसके बाद उनके लंका में प्रवेश और सीता-माता की खोज और उनके पास तक पहुंचने का प्रसंग आज होगा।     प्रारंभ…

  • 15th Jul 2019

    प्रविसि नगर कीजे सब काजा, हृदय राखि कौशलपुर राजा।

    गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करना मैंने शुरू किया जो कम से कम दो-तीन दिन और चलेगा। मैं मुकेश जी द्वारा गये गए भाग में से ही कुछ अंश यहाँ दे रहा हूँ, जो मुझे याद आ रहे हैं। मुझे आशा है कि इस अमर काव्य के…

  • 14th Jul 2019

    राम काज सब करिहऊ, तुम बल-बुद्धि निधान!

    अभी दो तीन दिन पहले ही राजनैतिक परिप्रेक्ष्य का संदर्भ देते हुए श्रीरामचरितमानस के सुंदर कांड से कुछ भाग उद्धृत किया था, जिसमें महाबली रावण के अहंकार और विनाशोन्मुख होने को दर्शाया गया था, जब उसको किसी की सलाह अच्छी नहीं लगती।     फिर मुझे खयाल आया कि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस,…

  • 13th Jul 2019

    There was a time, when I used Ink Pen!

    Yes there was a time, when in India we used coins called Athanni (half rupee), Chavanni (quarter rupee) or say four Aannas, 2 Paisa coin and round one paisa coin of brass with a round hole also in the middle. That was another period. There were chaupals, especially in villages where people gathered and talked…

  • 12th Jul 2019

    फूल, मोमबत्तियां, सपने

    पुराने कवि-कथाकारों की रचनाएं शेयर करने के क्रम में, मैं आज विख्यात कवि, कथाकार और धर्मयुग पत्रिका के संपादक रहे स्व. डॉ. धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। यह फूल, मोमबत्तियां और टूटे सपने ये पागल क्षण यह काम–काज दफ्तर फाइल, उचटा सा जी भत्ता वेतन, ये सब सच है! इनमें…

  • 11th Jul 2019

    कौन तुम मेरे हृदय में

    हिंदी कविता भी दुनिया के अन्य साहित्य आंदोलनों की तरह अनेक युगों से होते हुए आज की स्थिति तक आई है। एक दौर था हिंदी कविता का जिसे हम छायावाद के नाम से जानते हैं इस युग में जहाँ पंत, प्रसाद, निराला जैसे महान पुरुष कवि हुए, वहीं इस युग में महादेवी वर्मा जी का…

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