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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Aug 2019

    उर सागर के सीप!

    आज फिर से मन है कि मेरे प्रिय गीत कवियों में से एक, मेरठ के सुमधुर गीत-सर्जक स्व. भारत भूषण जी का एक गीत शेयर करूं। अभिव्यक्ति में भावों की सघनता क्या होती है, यह इन गीतों से मालूम होता है, थोड़े से शब्दों में कितनी गहरी बात कह दी जाती है। आइए इस गीत…

  • 9th Aug 2019

    Scrapping of Article 370, a really bold decision!

    The Modi government has taken some really bold and revolutionary decisions, most important amongst them are the banning of Triple Talaaq and now the latest one- doing away with Article 370 of the constitution. While the decision on Triple Talaaq would give a long overdue relief of our Muslim sisters, who were constantly facing injustice…

  • 8th Aug 2019

    कैनरी व्हार्फ रिवर फ्रंट-लंदन!

    अपने लंदन में होने की खबर तो मैंने कल दे दी थी। अब एक फर्क़ तो ये पड़ेगा कि मेरा ब्लॉग का आलेख पोस्ट करने का टाइम बदल जाएगा। जैसे मैं यहाँ देर रात में पोस्ट करूंगा तो वो चिट्ठी भारत में ब्रह्म-मुहूर्त में खुलेगी। जब कुछ नया देखूंगा तो वह पोस्ट यात्रा-ब्लॉग का रूप…

  • 7th Aug 2019

    अबके बरस फिर से लंदन!

    पिछले वर्ष लंदन आया था जून में और एक माह तक यहाँ रहने के बाद जुलाई में वापस गोवा गया था। इस बार फिर लंदन आ पहुंचा हूँ, आशा करता हूँ कि इस बार के प्रवास में भी कुछ अच्छा शेयर कर पाऊंगा।   लंदन में मेरे बेटा-बहू रहते हैं, उनके घर ही इस बार…

  • 6th Aug 2019

    69. अब जागना होगा हमें कब तक बता आवारगी!

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है ये पुरानी ब्लॉग पोस्ट- अब फिर से लौटकर आवारगी पर आता हूँ, आवारगी की बात मैंने एक ब्लॉग में की और कहा कि आगे भी इस विषय में बात करूंगा, मुझे लगता कुछ और नामों को आवारगी के दायरे में डाल सकते हैं, जिनमें…

  • 5th Aug 2019

    वैसे ही टूट गए हम!

    आज हिंदी नवगीत आंदोलन के एक प्रमुख हस्ताक्षर रहे स्व. रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, मैंने शुरू में भी रंजक जी के कुछ गीत शेयर किए हैं। आज का गीत, कुछ यूं समझिए कि जैसे शाम होती है, विशेष रूप से महानगर में, सड़कों पर भीड़ आ जाती है। अपने…

  • 4th Aug 2019

    मैंने अपना दिन बिताया- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 3rd Aug 2019

    मैंने वो घर बदल लिया है!

    बहुत सी बार मंच के कुछ ऐसे पुराने कवि याद आते हैं जिनकी कुछ रचनाएं बहुत लोकप्रिय हुई थीं, ऐसे ही एक कवि थे स्व. शिशुपाल सिंह ‘निर्धन’ जी, उनकी बहुत सी अच्छी रचनाएं होंगी, लेकिन यह रचना बहुत प्रसिद्ध थी, जिसे वे एक पुराने दुख के साथ बहुत चुनौती पूर्ण अंदाज में संवाद के…

  • 2nd Aug 2019

    जिसमें नया कुछ दिख सके, वह एक दर्पण चाहिए

    आज हिंदी काव्य मंचों के अत्यंत प्रसिद्ध कवियों में से एक, स्व. रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत शेयर करने का मन हो रहा है। जैसे किसी ने कहा है- ‘मंज़िलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, सिर्फ पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’ कुछ वैसी ही…

  • 1st Aug 2019

    तुम चलती गईं- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

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