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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Mar 2020

    केवल कीं नंगी अठखेलियाँ हवा ने!

    एक बार फिर से मैं अपने एक प्रिय कवि-नवगीतकार रहे स्व. रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ।हूँ। यह गीत रंजक जी के 1969 में प्रकाशित हुए नवगीत संकलन ‘हरापन नहीं टूटेगा’ से लिया गया है। आजकल दुनिया में जो कोरोना की महामारी फैली है, हजारों लोग इस भयावह रोग की भेंट…

  • 26th Mar 2020

    मरण बाद मैंनू सजा के चलणगे!

    आज फिर से एक पंजाबी गीत शेयर कर रहा हूँ, यह गीत भी श्री शिव कुमार बटालवी जी ने लिखा है, वैसे इसे लोक गीत भी कहा जाता है, संभवतः कुछ लोग लोक मन से इतना जुड़ जाते हैं कि उनके गीत को समाज अपना लेता है। इस गीत को श्री आसा सिंह मस्ताना जी…

  • 25th Mar 2020

    मैं तैनू पीना के तू मैंनू पीनी?

    आज एक अलग तरह का गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे ज़नाब गुलाम अली जी ने अनोखे अंदाज़ में गाया है। श्री शिव कुमार बटालवी जी ने इस गीत को लिखा है। अक्सर कवि-शायर लोग शराब की तारीफ में बहुत सी कविताएं और गीत लिखते हैं। आज का यह गीत शराब के वीभत्स रूप को…

  • 24th Mar 2020

    चेहरा है जैसे झील मे हँसता हुआ कंवल!

    जैसा कि मेरे नियमित पाठक जानते होंगे, मुकेश जी मेरे परम प्रिय गायक हैं, जब मैं फिल्मी गीत शेयर करता हूँ तब सबसे पहले मेरा ध्यान मुकेश जी के गाये हुए गीतों की ओर जाता है, इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य गायकों के प्रति मेरा उतना सम्मान नहीं है। ऐसे भी लोग हैं…

  • 23rd Mar 2020

    Testing times for the human race!

    We often learn from our scriptures, in the preachings and poetry of our Saints that it is our miseries which teach us the most effective lessons. I remember a famous poetry piece I think it is written by Goswami Tulsidas Ji, which says- ‘Sukh ke maathe sil pare, naam hriday se jaaye, balihari ya dukh…

  • 22nd Mar 2020

    ज्ञानेंद्रियां- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 21st Mar 2020

    मेरा कुर्ता सिला दुखों ने, बदनामी ने काज निकाले- गोपालदास नीरज

    आज स्व. गोपाल दास ‘नीरज’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। नीरज जी को गीतों का राजकुंवर कहा गया है लेकिन इस गीत में उन्होंने खुद को पीड़ा का राजकुंवर कहा है। नीरज जी ने अन्य अनेक लोगों के साथ मिलकर हिंदी के साहित्यिक गीतों को भारतीय फिल्मों में स्थान दिलाया था। स्व.…

  • 20th Mar 2020

    अपनी भाषा की रोशनी में चलता रहूँ – रमेश रंजक

    आज मैं अपने प्रिय कवियों में से एक रहे स्व. रमेश रंजक जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। यह जानकर अच्छा लगता है कि रमेश रन्जक जी से कुछ बार बात करने का, उनके नवगीत सुनने का अवसर मिला और एक बार उन्होंने मेरा गीत सुनकर उसे नवगीत संकलन अंतराल-4 में प्रकाशित करने…

  • 19th Mar 2020

    वह विशाल मन दो- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ !

    आज मैं भारतवर्ष में हिंदी के एक महान कवि, जिन्हें ओज और शृंगार दोनो प्रकार की कविताओं में महारत हासिल थी, वे सांसद भी रहे लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। ऐसे महान रचनाकार स्व. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ, आइए देखें कि वे इस कविता…

  • 18th Mar 2020

    समुद्रतट पर-रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

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