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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Apr 2020

    जहाँ छाया प्रकाश का पीछा करती है – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 5th Apr 2020

    Utilising Lockout time!

    Today I would write about my experience and routine activity during Lockout. I have been a retired person for last 10 years. Before that I worked near Lucknow. After retirement I shifted to Gurgaon, lived there for around 5 years and then shifted to Gurgaon.     I have been mostly living at home for…

  • 4th Apr 2020

    कोरोना और तब्लीगी जमात!

    आज का समय बहुत कठिन समय है, मुझे विश्वास है कि यह समय भी बीत जाएगा, मानव समाज ‘कोरोना वायरस’ नाम की इस मुसीबत पर अंततः विजय प्राप्त करेगा। आज जो लोग यह अनुभव कर रहे हैं, वे आने वाली पीढ़ियों को अपने इस अनुभव के बारे में बताएंगे। कुल मिलाकर क्या कुछ होगा हमारे…

  • 3rd Apr 2020

    उतरे कभी ना जो खुमार वो, प्यार है!

    आज स्व. नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। यह एक फिल्मी गीत है, जो उन्होंने फिल्म- प्रेम पुजारी के लिए लिखा था, जिसे एस. डी. बर्मन जी के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार जी ने गाया था। इस गीत में नीरज ने प्रेम का एक अनोखा फार्मूला प्रस्तुत किया है। लीजिए प्रस्तुत…

  • 2nd Apr 2020

    रंग होगा न बदन होगा न चेहरा होगा!

    आज मैं साहिर होशियारपुरी जी की लिखी एक गज़ल शेयर कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह जी और चित्रा सिंह जी ने बड़े खूबसूरत अंदाज़ में गाया था। यह एक छोटी सी लेकिन बहुत प्यारी गज़ल है, इसका पहला शेर ही यह बताता है कि जब समय बदलता है तब बहुत कुछ बदल जाता है।…

  • 1st Apr 2020

    हाँफने लगा बूढ़ा आसमान लादे टूटे अणु की धूल- सोम ठाकुर

    आज फिर से एक बार मैं अपने प्रिय कवियों मे से एक श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। इस गीत का विषय क्षेत्र काफी व्यापक है, आज की दुनिया जिसमें नफरत हावी है, एटम बम एक हथियार बन गया जिससे देश एक-दूसरे को डराते रहते हैं और पता नहीं कब…

  • 31st Mar 2020

    पवित्रता- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 30th Mar 2020

    कोरोना के खतरे के बीच!

    आजकल दुनिया भर में फैली कोरोना की महामारी, हजारों लोग इस भयावह रोग की भेंट चढ़ चुके हैं, ऐसे में  आज के वातावरण के बारे में कुछ बात करने का मन है। यह एक ऐसा वातावरण है, जिसका अनुभव मुझे तो अपने जीवन-काल में कभी नहीं हुआ है। ऐसी महामारी जो पूरी दुनिया में बुरी…

  • 29th Mar 2020

    आज सड़क के जीव उदास हैं!

    आज बाबा नागार्जुन जी की एक प्रसिद्ध कविता याद आ रही है- ‘अकाल और उसके बाद’। इस कविता में अकाल के प्रभाव को बड़े सुंदर तरीके से दर्शाया गया है। जब घर में चूल्हा जलता है तब केवल घर के मानव सदस्य ही तृप्त नहीं होते अपितु ऐसे अनेक जीव भी भोजन पाते हैं, जिनमें…

  • 28th Mar 2020

    पर अपने सपनों को पंख कब मिले!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ-     बहुत सी बार ऐसा होता है कि कोई कविता शुरू करते हैं, कुछ लाइन लिखकर रुक जाते हैं। फिर आगे नहीं बढ़ पाते, लेकिन वो लाइनें भी दिमाग से नहीं मिट पातीं। कविता की ये पंक्तियां, कभी दीपावली के आसपास ही लिखी…

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