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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Mar 2020

    Opposition turning irrelevant in India!

    I normally avoid discussing about politics. It appears that there is nothing serious to discuss about today’s politicians, in India. In fact when I think of our politicians, specially those in opposition today, it appears that Mr. Modi   has turned them into a big zero.     Sometimes I feel that some film personalities, like…

  • 6th Mar 2020

    जब राजा फँसता दिखे पैदल दे पिटवाय!

    आज मैं हिंदी गीतों के राजकुंवर, स्व. गोपाल दास ‘नीरज’ जी के लिखे कुछ दोहे शेयर कर रहा हूँ, जैसे गज़ल के शेरों में संक्षेप में बड़ी बात कही जाती है, दोहे भी बहुत लंबे समय से, थोड़े में अधिक बात कहने के लिए प्रयोग किए जाते रहे हैं, तुलसीदास जी के और उनसे भी…

  • 5th Mar 2020

    मुझे इस शहर ने गलियों का बंजारा बना डाला!

    आज गुलाम अली साहब का गाया हुआ एक गीत याद आ रहा है, जिसे 1990 में रिलीज़ हुई फिल्म- आवारगी में फिल्माया गया था, गीत को लिखा है- आनंद बक्षी जी ने और संगीत अनु मलिक जी का है। कुल मिलाकर यह गीत गुलाम अली जी ने बड़े सुंदर ढंग से गाया है और बहुत…

  • 4th Mar 2020

    कृतघ्न संताप – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 3rd Mar 2020

    तव मूरति विधु उर बसहि, सोई स्यामता आभास!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ-     आज गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का एक अत्यंत प्रेरक प्रसंग याद कर लेते हैं। आजकल नियोजक अपने कर्मचारियों का चयन करते समय तथा बाद में अनेक अवसरों पर उनका मनोवैज्ञानिक परीक्षण करते हैं। श्रीराम जी को लंका पर चढ़ाई करनी…

  • 2nd Mar 2020

    पथ ही मुड़ गया था – डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन

    हिंदी साहित्य का भंडार इतना वृहद है, एक से एक श्रेष्ठ कवि हमारे देश में हुए हैं, जिन्होंने साहित्य में अपना अमूल्य योगदान किया है। कुछ कवि हमें व्यक्तिगत रूप से ज्यादा अच्छे लगते हैं, हम उनकी रचनाओं को अक्सर याद करते हैं लेकिन कितने ही मां भारती के सपूत हैं, जिनको हम भूल जाते…

  • 1st Mar 2020

    Two Yards Of Land!

    This life of ours is termed as ‘Mirage’ by many learned people and Saints. We come to this world, we learn, acquire knowledge and skills as per our requirements and capacity and then we wish to get into a service or business, that we are able to get into for living a life fulfilling our…

  • 29th Feb 2020

    एक पंछी भी यहाँ शायद नहीं है!

    दुष्यंत कुमार जी हिंदी के एक श्रेष्ठ रचनाकार रहे हैं, हिंदी कविता में उनका अच्छा-खासा योगदान है लेकिन आम जनता के बीच उनको विशेष ख्याति उस समय मिली जब उन्होंने आपात्काल में विद्रोह का स्वर गुंजाने वाली गज़लें लिखीं, बाद में इन गज़लों को एक संग्रह में सम्मिलित किया गया, जिसका शीर्षक है- ‘साये में…

  • 28th Feb 2020

    सुबह का सूर्य भी रथ से उतरकर, सुनेगा जुगनुओं का हुक्मनामा!

    आज सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। जब अपनी नियोजक कंपनी के लिए मैं कवि सम्मेलनों का आयोजन किया करता था तब अनेक बार उनसे मिलने का अवसर मिला, बहुत सहृदय व्यक्ति और अत्यंत उच्च कोटि के रचनाकार हैं। उनके अनेक गीत मन पर अंकित हैं। राष्ट्र, राष्ट्रभाषा और रचनाकर के…

  • 27th Feb 2020

    शरमा न जाएं फूलों के साये!

    आज ऐसे ही एक पुरानी फिल्म का गीत याद आ रहा है, यह गीत है 1961 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘नज़राना’ का, जिसके नायक राज कपूर जी थे और नायिका थीं वैजयंती माला जी। इस गीत को लिखा है राजिंदर कृष्ण जी ने और रवि जी के संगीत निर्देशन में इसे गाया है- मेरे प्रिय…

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