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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th May 2018

    207. राहत ना कहो उसको!

    वर्ष 1971 में एक फिल्म आई थी- अनुभव, मुख्य भूमिकाओं में थे- संजीव कुमार जी और तनूजा जी। निर्माता, निर्देशक- बासु भट्टाचार्य जी की यह फिल्म उनके कुशल निर्देशन, इसमें शामिल कलाकारों के शानदार अभिनय के लिए काफी प्रसिद्ध हुई थी। इस फिल्म के लिए मन्ना डे जी द्वारा, संगीतकार कनु रॉय की धुन पर…

  • 18th May 2018

    68. पहुंचा कौन शिखर पर!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग – एक विषय जिसके संबंध में बात करने का बहुत बार मन होता है, वह है टेलेंट की खोज से संबंधित प्रतियोगिताएं। अब वह गीत-संगीत हो, या नृत्य आदि हों सभी क्षेत्रों मे प्रतिभाओं की खोज के लिए प्रतियोगिताएं होती हैं। शुरू में इन प्रतियोगिताओं को…

  • 17th May 2018

    206. मैं वो परवाना हूँ, पत्थर को मोम कर दूं!

    Three Day Quote Challenge – Day 3 प्रेम विस्तार है, स्वार्थ संकुचन है, इसलिए प्रेम जीवन का सिद्धांत है। वह जो प्रेम करता है जीता है, वह जो स्वार्थी है मर रहा है। इसलिए प्रेम के लिए प्रेम करो, क्योंकि जीने का यही एक मात्र सिद्धांत है, वैसे ही जैसे कि तुम जीने के लिए…

  • 16th May 2018

    I just want to inform all my friends connected with me at samaysakshi.wordpress.com  that this account is going to close. You are requested  to keep in touch with me at my new address- samaysakshi.in Wish you all the best.   S.K.Sharma

  • 16th May 2018

    205. तू अपनी एक ठोकर में सौ इंक़लाब लेकर चल!

    Three Day Quote Challenge हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का धयान रखिए कि आप क्या सोचते हैं. शब्द गौण हैं| विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं – स्वामी विवेकानंद   थ्री डे चैलेंज के अंतर्गत ब्लॉग पोस्ट लिखने का आज दूसरा दिन है। शुरू…

  • 15th May 2018

    203. जो एक सपना अपनाए!

    Three Day Quote Challenge छोटे सपने देखना अपराध है- प्रो. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम मुझे साथी ब्लॉगर अनामिका जी ने Three Day Quote Challenge के लिए नामित किया है, मैं अनामिका जी का आभारी हूँ और यह चुनौती स्वीकार करता हूँ। अनामिका जी बहुत सुंदर ब्लॉग लिखती हैं, जिनको  https://anamikaisblogging.wordpress.com  पर देखा जा सकता है। मैं चाहूंगा…

  • 14th May 2018

    203. चराग़ों को जलाने में जला ली उंगलियाँ हमने!

    आज इंसान की ज़िंदगी में जहाँ साधन संपन्नता बढ़ती जा रही है, वहीं प्रतियोगिता भी बढ़ रही है, जो साइकिल पर है उसे स्कूटर, मोटरसाइकिल की ललक है, जो इन पर उसका ध्यान कार पर टिका है और कार लेने के बाद मेरे भाई कोई एक मॉडल थोड़े ही है, ये मॉडल तो कुछ लाख…

  • 13th May 2018

    68. हाय रे हाय ओ दुनिया हम तेरी नज़र में आवारे!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग – एक फिल्मी गाना याद आ रहा है, फिल्म थी- मैं नशे में हूँ, यह गीत राज कपूर पर फिल्माया गया है, शैलेंद्र जी ने लिखा है, शंकर जयकिशन का संगीत और आवाज़ है मेरे प्रिय गायक मुकेश जी की। बोल हैं- हम हैं तो चांद…

  • 12th May 2018

    67. इसलिए धर्म को प्यार बना!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग, इसमें जिस बाबा की बात की गई है, असल में उसके बाद एक और बाबा को सज़ा हो चुकी है – एक बाबा को सज़ा का ऐलान होने वाला है। अच्छा नहीं लगता कि बाबाओं को इस हालत से गुज़रना पड़े। हमारे देश में परंपरा रही…

  • 11th May 2018

    66. न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किसका था!

    आज कुछ गज़लें, कवितायें जो याद आ रही हैं, उनके बहाने बात करूंगा। एक मेरे दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी की शनिवारी सभा के साथी थे- राना सहरी, जो उस समय लिखना शुरू कर रहे थे, बाद में उनकी लिखी कुछ गज़लें जगजीत सिंह जी ने भी गाईं, उनमें से ही एक को याद कर रहा हूँ।…

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