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चलो मयकदे चलें!
यारो घिर आई शाम, चलो मयकदे चलें,याद आ रहे हैं जाम, चलो मयकदे चलें| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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ग़म अभी सोया है जगाए कौन!
जावेद अख़्तर साहब भारतीय शायरों में और मुंबई के फिल्म जगत में एक जाना-माना नाम हैं| उन्होंने सलमान खान जी के पिता सलीम खान साहब के साथ मिलकर अनेक हिट फिल्मों की पटकथा भी लिखी थी, जिनमें सुपर हिट फिल्म ‘शोले’ भी शामिल थी, और हां फिल्मों में गीत तो वे लंबे समय से लिख…
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इस नगरी क्यूँ आये थे!
रुख़्सत के दिन भीगी आँखों उसका वो कहना हाए “क़तील”,तुम को लौट ही जाना था तो इस नगरी क्यूँ आये थे| क़तील शिफ़ाई
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पेड़ पे बैठी इक चिड़िया ने—
कैसा प्यारा मंज़र था जब देख के अपने साथी को,पेड़ पे बैठी इक चिड़िया ने अपने पर फैलाये थे| क़तील शिफ़ाई
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कुछ फूल मेरे हम-साये थे!
कैसे जाती मेरे बदन से बीते लम्हों की ख़ुश्बू,ख़्वाबों की उस बस्ती में कुछ फूल मेरे हम-साये थे| क़तील शिफ़ाई
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सौदा जिससे करने आये थे!
उसने कितने प्यार से अपना कुफ़्र दिया नज़राने में,हम अपने ईमान का सौदा जिससे करने आये थे| क़तील शिफ़ाई
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मेरे अन्दर चली थी आँधी—
मेरे अन्दर चली थी आँधी ठीक उसी दिन पतझड़ की,जिस दिन अपने जूड़े में उसने कुछ फूल सजाये थे| क़तील शिफ़ाई
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उसके नैन भर आये थे!
जाने वो क्या सोच रहा था अपने दिल में सारी रात,प्यार की बातें करते करते उसके नैन भर आये थे| क़तील शिफ़ाई