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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Dec 2018

    Make Revolution possible, sitting at home- 1

    Yes, shopping has been a big activity for people, that involves physical movement from one shop to another, to big shopping malls. This has been a good exercise too especially for ladies and it also helped them in honing of their negotiation skills. This activity would never end but now there is a new and…

  • 26th Dec 2018

    मैं चाहता हूँ कि तुम हो जाओ अविचल

    आज फिर से, मैं विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई एक कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज के लिए पहले प्रस्तुत है…

  • 25th Dec 2018

    25. अखबारों में, सेमीनारों में, जीता है आम आदमी!

    पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं। जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! अब बारी थी मेरे सेवाकाल के अंतिम नियोजक, एनटीपीसी लिमिटेड के साथ जुड़ने की, जहाँ मेरी सेवा भी सबसे लंबी रही। 21 मार्च, 1988 को मैंने एनटीपीसी की विंध्याचल परियोजना में कार्यग्रहण…

  • 24th Dec 2018

    कविता- पाब्लो नेरुदा

    आज फिर से, लंबे अंतराल के बाद, मैं विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई एक कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज के…

  • 23rd Dec 2018

    Bhopal Visit- Sanchi, Maanav Sangrahaalaya etc.

    This time the prompt on #IndiSpire is for writing about an interesting visit to a place, which is neither a hill station and neither near the sea. I recently visited Bhopal, had to go there for attending a marriage ceremony and I utilized the chance for visiting some places of interest. In fact I had…

  • 22nd Dec 2018

    Real happiness is in making others happy!

    What makes us happy? Actually it automatically does, we do not even think why we are being happy, it naturally happens. When something we desire happens, like if our team, be it a street team, school team or national team succeeds, we naturally feel happy. And team of what kind?  May be a school team,…

  • 21st Dec 2018

    पीपल्स मॉल, भोपाल

    भोपाल प्रवास बहुत लंबा नहीं था, इसे समाप्त होना ही था। वहाँ रहते हुए पहले बुद्ध के धार्मिक संदेश को प्रसारित करने के लिए सम्राट अशोक द्वारा तीसरी शताब्दी ई.पू. में निर्मित बौद्ध स्तूप देखे। उसके बाद आलग-अलग स्थानों के संदर्भ में मानव-जीवन के विकास के विभिन्न चरणों की झांकी दिखाने वाले राष्ट्रीय मानव संग्रहालय…

  • 20th Dec 2018

    भारत भवन, भोपाल

    भोपाल प्रवास बहुत लंबा नहीं था, तीसरी बार जब हम घूमने के लिए बाहर निकले तब पहले तो कुछ समय के लिए हम लेक व्यू मार्ग पर गए, एक बार फिर से भोपाल के छोटे-बड़े ताल का नज़ारा लेने के लिए।   हालांकि इस समय मैं गोवा में रहता हूँ, जहाँ घर से ही समुद्र…

  • 19th Dec 2018

    राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल

    किसी नए नगर में जब हम जाते हैं तब सामान्यतः क्या देखते हैं? अक्सर हम ऐतिहासिक इमारतें देखते हैं, जिनमें इतिहास के विभिन्न कालखंडों में कौन शासक रहे थे और उनके माध्यम से ही उस काल-विशेष की पहचान मानी जाती है। जैसे भारत में हम मुगलों द्वारा बनाए गए किले और महल, अंग्रेजों द्वारा बनाए…

  • 18th Dec 2018

    बुद्धम शरणम गच्छामी- सांची के स्तूप!

    भोपाल पहले अनेक बार गया हूँ, तालाबों के लिए मशहूर इस पहाड़ी इलाके में बसे नगर से लंबे समय से नाता रहा है, परंतु पहले जब गया, तब मैं ब्लॉग नहीं लिखता था। इस बार जब सबसे पहले भ्रमण के बारे में सोचा तो सम्राट अशोक द्वारा तीसरी शताब्दी ई.पू. में जिन स्तूपों का निर्माण…

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