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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Jan 2022

    साये में धूप लगती है

    यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है,चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए| दुष्यंत कुमार

  • 8th Jan 2022

    चिराग़ाँ हर एक घर के लिए!

    कहां तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए,कहां चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए| दुष्यंत कुमार

  • 8th Jan 2022

    पूछो मेरे दिल से!

    आज एक गीत फिल्म ‘अनिता’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी के मधुर स्वर में, इसका संगीत तैयार किया है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की संगीतमय जोड़ी ने और गीत लिखा था राजा मेहदी आली खां साहब ने| मुझे यह गीत भी विशेष रूप से प्रिय है और आज भी यह हमारे मन में गूँजता रहता है|…

  • 7th Jan 2022

    भूलना आसान न था!

    तुमसे छूट कर भी तुम्हें भूलना आसान न था,तुमको ही याद किया तुमको भुलाने के लिए| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jan 2022

    ताश के पत्तों-सी सजी है दुनिया!

    मेज़ पर ताश के पत्तों-सी सजी है दुनिया,कोई खोने के लिए है कोई पाने के लिए| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jan 2022

    मोतियों वाले मौसम!

    यूँ लुटाते न फिरो मोतियों वाले मौसम,ये नगीने तो हैं रातों को सजाने के लिए| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jan 2022

    कुछ हैं ज़माने के लिए!

    हम हैं कुछ अपने लिए कुछ हैं ज़माने के लिए,घर से बाहर की फ़ज़ा हँसने-हँसाने के लिए| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jan 2022

    खो जाए तो सोना है!

    दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है, मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jan 2022

    बच्चे को हँसाया जाए!

    घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें, किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jan 2022

    दुख ने दुख से बात की!

    मैं रोया परदेस में, भीगा मां का प्यार, दुख ने दुख से बात की, बिन चिट्ठी बिन तार| निदा फ़ाज़ली

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