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उसे मेरा कर दे!
है इख़्तियार में तेरे तो मोजेज़ा कर दे,वो शख़्स मेरा नहीं है उसे मेरा कर दे| राना सहरी
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तेरी याद को शबनम की तरह!
मैंने ख़ुशबू की तरह तुझ को किया है महसूस,दिल ने छेड़ा है तेरी याद को शबनम की तरह| राना सहरी
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मोहर्रम की तरह!
मेरे महबूब मेरे प्यार को इल्ज़ाम न दे,हिज्र में ईद मनाई है मोहर्रम की तरह| राना सहरी
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बदलते हुए मौसम की तरह!
कभी ग़ुंचा कभी शोला कभी शबनम की तरह,लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरह| राना सहरी
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देखेगा कौन?
हिन्दी नवगीत आंदोलन के प्रणेता स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी, हिन्दी गीत साहित्य में अपने योगदान के लिए हमेशा याद किए जाएंगे| आज मैं स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूं- बगिया में नाचेगा मोर,देखेगा कौन?तुम बिन ओ मेरे चितचोर,देखेगा कौन? नदिया का यह नीला जल, रेतीला घाट,झाऊ की झुरमुट के बीच,…
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अच्छी-सी जगह ढूंढ रहे हैं!
ईमां की तिजारत के लिए इन दिनों हम भी,बाज़ार में अच्छी-सी जगह ढूंढ रहे हैं| राजेश रेड्डी
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अपना पता ढूंढ रहे हैं!
पहले तो ज़माने में कहीं खो दिया ख़ुद को,आईने में अब अपना पता ढूंढ रहे हैं| राजेश रेड्डी
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अपना ख़ुदा ढूंढ रहे हैं!
पूजा में, नमाज़ों में, अज़ानों में, भजन में,ये लोग कहाँ अपना ख़ुदा ढूंढ रहे हैं| राजेश रेड्डी
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सिरा ढूंढ रहे हैं!
दुनिया को समझ लेने की कोशिश में लगे हम,उलझे हुए धागों का सिरा ढूंढ रहे हैं| राजेश रेड्डी