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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th Jan 2022

    दोहराने लगे हैं!

    मौलवी से डाँट खा कर अहले-मक़तब,फिर उसी आयत को दोहराने लगे हैं| दुष्यंत कुमार

  • 24th Jan 2022

    क़तराने लगे हैं!

    मछलियों में खलबली है अब सफ़ीने,उस तरफ़ जाने से क़तराने लगे हैं| दुष्यंत कुमार

  • 24th Jan 2022

    क़ब्रिस्तान में घर मिल रहा है!

    एक क़ब्रिस्तान में घर मिल रहा है,जिसमें तहख़ानों में तहख़ाने लगे हैं| दुष्यंत कुमार

  • 24th Jan 2022

    समझाने लगे हैं!

    वो सलीबों के क़रीब आए तो हमको,क़ायदे-क़ानून समझाने लगे हैं| दुष्यंत कुमार

  • 24th Jan 2022

    फूल कुम्हलाने लगे हैं!

    अब तो इस तालाब का पानी बदल दो,ये कमाल के फूल कुम्हलाने लगे हैं| दुष्यंत कुमार

  • 24th Jan 2022

    लोग चिल्लाने लगे हैं!

    कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं,गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं| दुष्यंत कुमार

  • 24th Jan 2022

    कभी कभी !

    हिन्दी काव्य मंचों के अत्यंत कुशल गीतकार स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी के कुछ गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं, हिन्दी गीत साहित्य में उनका अमूल्य योगदान रहा है|आज मैं स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूं- कभी कभी जब मेरी तबियतयों ही घबराने लगती है,तभी ज़िन्दगी मुझे न जानेक्या-क्या समझाने…

  • 23rd Jan 2022

    मेरा हमनवा कर दे!

    अकेली शाम बहुत जी उदास करती है,किसी को भेज कोई मेरा हमनवा कर दे| राना सहरी

  • 23rd Jan 2022

    उसे हवा कर दे!

    मैं उस के जोर को देखूँ वो मेरा सब्र-ओ-सुकूँ,मुझे चराग़ बना दे उसे हवा कर दे| राना सहरी

  • 23rd Jan 2022

    रस्ता हरा भरा कर दे!

    ये रेत्ज़ार कहीं ख़त्म ही नहीं होता,ज़रा सी दूर तो रस्ता हरा भरा कर दे| राना सहरी

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