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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Oct 2019

    नग़मों की खिलती कलियां चुनने वाले!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ- अज्ञेय जी की एक कविता है-‘नए कवि से’, काफी लंबी कविता है, उसका कुछ हिस्सा यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ-   आ, तू आ, हाँ, आ, मेरे पैरों की छाप-छाप पर रखता पैर, मिटाता उसे, मुझे मुँह भर-भर गाली देता- आ, तू आ।  …

  • 26th Oct 2019

    क्या दीप जलाएं हम, तक़दीर ही काली है!

    दीपावली के अवसर पर, एक बार फिर से मुझे अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है। दीपावली भी हमारी खुशियों को जाहिर करने का एक अवसर है, हम जितने अधिक खुश होंगे, उतने ही अधिक उत्साह के साथ हम इन त्यौहारों के अवसर पर उल्लास के साथ भाग लेंगे।…

  • 25th Oct 2019

    घर – गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की कविता

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 23rd Oct 2019

    अपना घर तो गिरा, दरोगा के घर नए उठे!

      आज डॉ. शांति सुमन जी का लिखा एक नवगीत याद आ रहा है, जो बहुत साल पहले झारखंड में आयोजित एक कवि सम्मेलन में पहली बार उनके मुंह से सुना था। उस समय मैं हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की मुसाबनी माइंस में कार्यरत था, जो काफी पहले बंद हो चुकी हैं, यह शायद 1984-85 की…

  • 22nd Oct 2019

    Being Contributing Members of Society!

    It is our life and we choose a role for ourselves and that determines what success means to us and it may be quite different from others. There are so many things which frame our personality, it starts with the ‘Samskaaras’ the values which we imbibe from our family and the atmosphere of initial neighborhood,…

  • 21st Oct 2019

    खगोलशास्त्री- रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि  गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 19th Oct 2019

    रोशनी को शहर से निकाला गया!

    कभी हुआ कि घर में कामवाली अपने साथ अपने 5-6 साल के बेटे को ले आई, वह बच्चा घर में इधर-उधर घूमता है, कमर से हाथ पीछे करके निरीक्षण करता है, ये अच्छी बात है कि उसको यह एहसास नहीं है कि यहाँ उसकी मां की स्थिति क्या है! मुझे कभी लगता है कि मेरा…

  • 18th Oct 2019

    जो एक सपना अपनाए!

    आज फिर से सपनों की बात करते हैं, सपने वे जो हम अपने जीवन के बारे में जीते-जागते देखते हैं, इतने कि वे हमारी नींद के दौरान भी आने के लिए मज़बूर हो जाएं। मेरा सपना रहा है हमेशा से क्रिएटिव राइटिंग के क्षेत्र में नाम कमाने का। ऐसा नहीं है कि जीवन में कुछ…

  • 17th Oct 2019

    किस्सा मत्स्य कन्या का!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ, कल मैंने ज़िक्र किया था कि दो ऐसी पोस्ट हैं, जो रहस्य से जुड़ी हैं, ऐसी जिनके बारे में शायद आपने सुना हो या पढ़ा हो कि ऐसा होता है, आज उनमें से ही, मेरे एक मित्र के संस्मरण के रूप में, लीजिए प्रस्तुत…

  • 16th Oct 2019

    इच्छाधारी सर्प !

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ, असल में दो ऐसी पोस्ट हैं, जो रहस्य से जुड़ी हैं, ऐसी जिनके बारे में शायद आपने सुना हो या पढ़ा हो कि ऐसा होता है, लेकिन यहाँ मेरे एक मित्र के संस्मरण के रूप में है, लीजिए प्रस्तुत है ये पुरानी ब्लॉग पोस्ट-…

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