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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Mar 2026

    मेरा हिस्सा क्यूँ नहीं होता!

    मिरी इक ज़िंदगी के कितने हिस्से-दार हैं लेकिन,किसी की ज़िंदगी में मेरा हिस्सा क्यूँ नहीं होता| राजेश रेड्डी

  • 4th Mar 2026

    करिश्मा क्यूँ नहीं होता!

    किसी दिन ज़िंदगानी में करिश्मा क्यूँ नहीं होता,मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ ज़िंदा क्यूँ नहीं होता| राजेश रेड्डी

  • 4th Mar 2026

    दैर ओ हरम में बसने वालो!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में खामोश गज़ीपुरी जी कि लिखी यह खूबसूरत ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जगजीत सिंह जी ने बहुत सुंदर तरीके से गाया है- दैर ओ हरम में बसने वालो, मयख्वारों में फूट न डालो! आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *****

  • 4th Mar 2026

    उस तरफ़ जाते हुए !

    उस तरफ़ जाते हुए अब दिल दहलता है ‘नज़ीर’,ज़िंदगी में जिस तरफ़ से बार-हा आया गया| नज़ीर बनारसी

  • 4th Mar 2026

    नीम-तरू से फूल झरते हैं!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी गीतकार स्वर्गीय किशन सरोज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।किशन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय किशन सरोज जी का यह नवगीत– नीम-तरू से फूल झरते हैंतुम्हारा मन नहीँ छूतेबड़ा आश्चर्य है । रीझ, सुरभित हरित-वसनाघाटियों परव्यँग्य…

  • 3rd Mar 2026

    ख़ैरियत क्या पूछते हो!

    ख़ैरियत क्या पूछते हो गेसू-ए-हालात की,वक़्त ही उलझा गया था वक़्त ही सुलझा गया| नज़ीर बनारसी

  • 3rd Mar 2026

    वो दिवाना हर जगह!

    आप ने अपनी ज़बाँ से जिस को अपना कह दिया,वो दिवाना हर जगह खोया हुआ पाया गया| नज़ीर बनारसी

  • 3rd Mar 2026

    था मिरा चेहरा मगर!

    आईना दिखलाने आए थे परेशानी के दिन,था मिरा चेहरा मगर मुझ से न पहचाना गया| नज़ीर बनारसी

  • 3rd Mar 2026

    प्याला प्रेम का -3

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं सोम ठाकुर जी के इस मधुर गीत का तीसरा भाग अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, मैंने पूरा गीत भी एक साथ रिकॉर्ड किया जो मैं कल प्रस्तुत करूंगा- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 3rd Mar 2026

    वो कहीं पाए गए!

    इंक़िलाब-ए-दहर बर-हक़ लेकिन ऐसा इंक़लाब,वो कहीं पाए गए और मैं कहीं पाया गया| नज़ीर बनारसी

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