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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Feb 2022

    सखि वसन्त आया!

    हिन्दी काव्य के गौरव और छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| ऐसा भी माना जाता है कि निराला जी के काव्य में कविता के आने वाले दौर के, नवगीत के भी अंकुर शामिल थे| निराला जी ने कविता में बहुत प्रयोग किए और…

  • 21st Feb 2022

    पसीने बांटता फिरता है!

    पसीने बांटता फिरता है हर तरफ़ सूरज, कभी जो हाथ लगा तो निचोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी

  • 21st Feb 2022

    मैं तोड़ फोड़ दूंगा उसे!

    बदन चुरा के वो चलता है मुझसे शीशा-बदन, उसे ये डर है कि मैं तोड़ फोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी

  • 21st Feb 2022

    ये कमाल है उसका!

    मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उसका, इरादा मैंने किया था कि छोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी

  • 21st Feb 2022

    जोड़ दूंगा उसे!

    कहीं अकेले में मिलकर झिंझोड़ दूँगा उसे, जहां जहां से वो टूटा है जोड़ दूंगा उसे| राहत इन्दौरी

  • 21st Feb 2022

    कलम आज उनकी जय बोल!

    आज मैं राष्ट्रप्रेम और ओज के कवि, स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों को नमन किया है| दिनकर जी ने जहां ‘मेरे नगपति, मेरे विशाल’ जैसी पंक्तियाँ लिखीं वहीं उन्होंने ‘उर्वशी’ जैसी महान रचना भी लिखी, जो…

  • 20th Feb 2022

    पढ़ते हैं सब ताज़ा ग़ज़ल मेरी!

    दम साध के पढ़ते हैं सब ताज़ा ग़ज़ल मेरी,किस लहजे में अबके मैं क्या बात बरतता हूँ । राजेश रेड्डी

  • 20th Feb 2022

    महक जाते हैं चाँद-सितारे भी!

    उस रात महक जाते हैं चाँद-सितारे भी,मैं नींद में ख़्वाबों को जिस रात बरतता हूँ । राजेश रेड्डी

  • 20th Feb 2022

    सदमात बरतता हूँ !

    कुछ और बरतना तो आता नहीं शे’रों में,सदमात बरतता था, सदमात बरतता हूँ । राजेश रेड्डी

  • 20th Feb 2022

    जो ज़ख्म मेरे दिल को!

    मिलते रहे दुनिया से जो ज़ख्म मेरे दिल को,उनको भी समझकर मैं सौग़ात, बरतता हूँ । राजेश रेड्डी

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